मैथीलि विवाह गीत (परिछन)
कहल तS जैत अछि वियाह सS विधे भारी..... मुदा ई एहेन विध कतोहू की और देखबाक लेल भेटत ?
गीत –परिछन |
१,परिछन करय हरषि चलू ,सजनी गे ,
दुलहा अवध किशोर सजनी गे !
रूप हुनिक मन हरलक सजनी गे ,
भेल जनकपुर शोर सजनी गे !
नील कमल सन सुन्दर सजनी गे ,
तोरल धनुष कठोर सजनी गे !
धिया सिया लय रामभद्र वर ,
विधि रचलन्हि समजोर सजनी गे !
कए परिछन मंडप वर आनू ,
निरखव नयन विभोर सजनी गे !
करू आरती मातु सुनैना ,
नहि आनंदक ओर सजनी गे !
२,निज निज जन्म सुफल करू सजनी ,
रघुनंदन केर परिछन कए केँ|
राम नयन मे काजर दए केँ,
राघव केर सिर चन्दन कए केँ |
वर परिछ्हु अरियाति लाउ सखी ,
शुभ शुभ मंगल गीत गाउ सखि,
वरक परीक्षा लेहु ज्ञान केर ,
ठक वक केर चिन्हारय दय केँ |
चुनि चुनि मधुर गारि दियऽ सजनी ,
कुल केर भेद खुलाशा कए केँ|
देह परीक्षा वस्त्र फोलि केँ,
योगक शिक्षा नाक पकडि केँ|
त्पन मिथिला मे कन्या दान सँ पूर्व आम महु विवाहक प्रथा अछि –
प्रस्तुत अछि एकटा आम महु विवाहक गीत |
रघुवर प्रेम विभोर ,चलल सिय आम महु विवाहय |
वाजन ध्वनि घनघोर ,चलल सिय आम महु विवाहय |
सिनूर पिठार सिय आम महु लेपल ,जगत केँनेह सिखाबय |
चलल ---
प्रेमक पीयर सूत लपेटल ,गाँठ सिनेह लगाबय ,
जीवन वगिया आम महु सन ,मिलनक मन्त्र सिखाबय |
चलल सिय आम महु विवाहय ||
साभार:- मिथिला संस्कार पेज
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
🌷🌷🌷🌷👉🌷
🚩🚩

कोई टिप्पणी नहीं