चैत पियाक याद सताबए
पसरल चैत पियाक याद सताबए
✍👤 नरायण मधुशाला
पसरल चैत पियाक याद सताबए
सखी हे वैशाख घामसँ देह कापए
जेठक राति बितैय जागि-जागि
असगर निनो टुटि जाई लागि-लागि
अखारक ओ बरसातमे छुपरछापर
साउनक सजधज लऽ गेल सावर
पिया बिनु हमरा निक ने लागए
पसरल चैत पियाक याद सताबए
सखी हे वैशाख घामसँ देह कापए
भादव अन्हारीयोमे जोहि-जोहि बाट
सगर रातिके हम तऽ कऽ देलौ परात
आसिनक ईजोरियोमे लागेनऽ तन-मन
कातिकक आकाशो दीप लगैय मुर्झायल सन
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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