सीता सन बेटी
।। गीत ।।
सीता सन बेटी छै जकरा ,
देतै तखन दाम किइए ।
धनुष दहेजक तोड़ऽ लेल,
आबै छथि ने राम किइए ।।
ई प्रथा दहेजक, छै व्याथा बनल ।
नोरे बेटीक, किइए कथा बनल ।।
छै पाएर जकर लक्ष्मी कहबै -------
भाग तकर छै बाम किइए ।
नारी पूजाक सभ जाप कऽरी ।
कोखिए मारि फेर पाप कऽरी ।।
एकछाहा बेटा सँ नञि सृष्टि चलत,
हेतै तखन सून्न ने गाम किइए ।
__✍मैथिल प्रशान्त जी
दुर्गोली, बेनीपट्टी
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