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अहीँ छी सान मैयाँ अहीँ स्वभिमान

अहीँ छी सान मैयाँ अहीँ स्वभिमान
मैयाँ दुर्गा हे ! अहीँ छी हमर प्राण
अहीँके दिहल मैयाँ अन,धन,सोनमा हे
अहीँके दिहल मैयाँ सुन्दर ललनमा हे
अहीँके दिहल हा ई जान
मैयाँ दुर्गा हे .................
लाल लाल चुनरी मैयाँ अहाँके चढाएब हे
नाना नवेद्य ल' क भोग लगाएब हे
करब नित गुणगान
मैयाँ दुर्गा हे ....... ......
अहाँ जे छोडब मैया हम क' त जाएब हे
विनु अहाँके जननी हम मरि जाएब हे
तें त मंगैछी भक्ति दान
मैयाँ दुर्गा हे ...............
लेखक .✍ विन्देश्वर ठाकुर

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