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अपन मिथिला आऽ अपन मैथिली भाषा

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अपन मिथिला आऽ अपन मैथिली भाषा

अशोक कुमार सहनी
माँ जानकी केर जनमभूमि मिथिला । जाही थाम चाकर बनी स्वयं भगवान् शिवशंकर उगना रूप धरी आयल छलाह । मुदा ताहि धरती केर आजुक दिनमें ई विडम्बना अछि जे की अपन अधिकार केर लेल दर–दर भटकी रहल अछि मुदा ओकर गुहार सुननिहार कियोक नहि छैक । विगत किछु दिन स मिथिला या मधेश केर पैघ–पैघ मञ्च पर ई सुनबाक भेटल जे की नेपाल सरकार के मैथिली भाषी पर ध्यान देबाक चाही आ  मैथिलि किताब और मास्टर सव केर सेहो बहाल करबाक चाही ।
हम हुनका स आ समस्त मिथिलावासी स’ कहए चाहब जे की कखन धरी तक आधा टा सोहारी आ नून खा–खा कए पेट भरैत रहब । अहि गप में कोनो दू राय नहि अछि जे की हमरा सब गोटे केर लेल ई बद्द गर्व केर गप जे कि नेपाल सरकार अहि समिधानमें मैथिली भाषा मातृभाषा सरह संस्थान देलक, नेपाल सरकार ओकरा लागू कैलक मुदा की माँ मैथिली मात्र एतबहिटा केर लेल हकÞदार अछि ?
कहैक लेल ता सब कियो इ कहैत छि जे की नेपाले टा नहि अपितु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड केर सभ्यतामध्ये एक टा प्राचीन सभ्यता अछि मिथिलाके । तखन मिथिला कियैक आध पेट भ रहतीह ।
जखन नेपाल केर आन परदेशमें भ सकैत अछि ता मिथिला आ सम्पूर्ण मधेशमें एहन कियाक नहि भ सकैत अछि जे की सब टा विषय मैथिलीमें होय । मैथिली केर माध्यम बनेबाक लेल हम सब हो–हल्ला कियाक नहि क’ रहल छी ?
उठू , जागू एखनधरि बेसी देर नहि भेल अछि नेपाल सरकार केर बिरोध कए ओकरा बता देल जाय कि आब हम सब अपन अधिकार नहि छोडब । हमरा सबके किछुओ कियाक नहीं कर्र परत । आबू एक साथ मिलजुलि कए शंखनाद करी आ नेपाल सरकार केर देखा दी जे कि तोरा हमर जरूरत छौक नहीं की हमरा तोरा स’  ।
✍अशोक कुमार सहनी
लहान–४ रघुनाथपुर
हाल (दोहा क कतार)

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