गाम आ शहर मे अंतर-
गाम आ शहर मे अंतर-
गाम :,
✒✍नीरज मिश्र "मुन्नू"
बोली गामक केहेन ठेकनगर, गाम मे मिठका बोलक मंतर।
गाम होईत अछि सभक अप्पन, सब यथार्थ नहि कोनो बड़प्पन ।
आन सेहो अप्पन सन होइ छै , सभक सब सम्मान करै छै ।
गायक गोबर सँ नीपल आँगन, भीत बला घर बड़ मनभावन ।
जट - जटिन , झिझिया - बटगमनी , मधुरे सन सामा आ लगनी ।
शहर :
शहरक बोली बड्ड अरुआयल, सदिखन लोक रहय अगुतायल ।
शहर मे मात्र कहै लेल अप्पन, शोणितक धार बहै अछि क्षण - क्षण ।
लग - पास केर पर - पड़ोसी, राखथि ने केकरो सँ बेसी ।
दुइ कोठली मे शहरक जीवन , रंगबिरही बीमारिक सीजन ।
भाग - दौड़ केँ एहि दुनियाँ मे , प्राण लोक केर चौअनियाँ मे ।
✍ नीरज मिश्र "मुन्नू"
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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गाम :,
✒✍नीरज मिश्र "मुन्नू"
बोली गामक केहेन ठेकनगर, गाम मे मिठका बोलक मंतर।
गाम होईत अछि सभक अप्पन, सब यथार्थ नहि कोनो बड़प्पन ।
आन सेहो अप्पन सन होइ छै , सभक सब सम्मान करै छै ।
गायक गोबर सँ नीपल आँगन, भीत बला घर बड़ मनभावन ।
जट - जटिन , झिझिया - बटगमनी , मधुरे सन सामा आ लगनी ।
शहर :
शहरक बोली बड्ड अरुआयल, सदिखन लोक रहय अगुतायल ।
शहर मे मात्र कहै लेल अप्पन, शोणितक धार बहै अछि क्षण - क्षण ।
लग - पास केर पर - पड़ोसी, राखथि ने केकरो सँ बेसी ।
दुइ कोठली मे शहरक जीवन , रंगबिरही बीमारिक सीजन ।
भाग - दौड़ केँ एहि दुनियाँ मे , प्राण लोक केर चौअनियाँ मे ।
✍ नीरज मिश्र "मुन्नू"
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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