उगु उगु उगु भेल बेर दीनानाथ (छठि गीत)
उगु उगु उगु भेल बेर दीनानाथ
✍अमित पाठक
दीनानाथ
उगु उगु उगु भेल बेर
दीनानाथ............
छँटि गेल रातुक स्याह अन्हारे
चुन-मुन चिड़ंईक टेर
दीनानाथ.............
जल बिच ठाढ़ करए सब सुमिरन
कर जोड़ि जेड़क-जेड़
दीनानाथ.............
हाथ उठाओल कएल वरतिया
नियम डेबल जत् भेल
दीनानाथ.............
अर्घक लगन बितए हे दिनकर
करब कतेक अबेर
दीनानाथ..............
रहि गेल अविध-सविध हम मानल
क्षमब हे प्रभु त्रुटि लेल
दीनानाथ...............
गीतकार ✍ अमित पाठक
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷👇
पोस्ट:-अशोक कुमार सहनी
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✍अमित पाठक
दीनानाथ
उगु उगु उगु भेल बेर
दीनानाथ............
छँटि गेल रातुक स्याह अन्हारे
चुन-मुन चिड़ंईक टेर
दीनानाथ.............
जल बिच ठाढ़ करए सब सुमिरन
कर जोड़ि जेड़क-जेड़
दीनानाथ.............
हाथ उठाओल कएल वरतिया
नियम डेबल जत् भेल
दीनानाथ.............
अर्घक लगन बितए हे दिनकर
करब कतेक अबेर
दीनानाथ..............
रहि गेल अविध-सविध हम मानल
क्षमब हे प्रभु त्रुटि लेल
दीनानाथ...............
गीतकार ✍ अमित पाठक
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पोस्ट:-अशोक कुमार सहनी
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