आहाँक पाछु भरल जवानी जियान कऽ देलियै
आहाँके पाछु भरल जवानी जियानकेs देलियै
✍अशरफ़ राईन
नै पुछु कतेक राति जाईग क बिहान कऽ देलियै
आहाँक पाछु भरल जवानी जियान कऽ देलियै
जीबैत छलौ मोने केर आँगना बना कऽ स्वर्ग
ठोकरा आहा हमर जिनगी सम्सान कऽ देलियै
कहितौ हमहू चाँन लाबि राखि दितौ छत पऽ
नाता जोडि आन सँग हमरा बिरान कऽ देलियै
की करू जिबू की मरू हम पड़ल छि दोधार मे
सोचि - सोचि आब सुरु हम पियान कऽ देलियै
कोना केओ करतै किनको प्रीत पर बिश्वास
मोहबत नाम केर जे आहाँ बदनाम कऽ देलियै
✍ अशरफ़ राईन
हाल : दोहा क़तार
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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