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बाट तोहर हम जोहि रहल

बाट तोहर हम जोहि रहल



✍👤मैथिल प्रशान्त 
1. 
भाव हियाकेँ फूल सन, 
गमकय बनिक' प्रीत । 
बाट तोहर हम जोहि रहल, 
बैसल तों कत' मीत ।। 

2. 
अएबेँ लौट तों एक दिन, 
आँगन राखल नीप । 
सारा परहक तुलसी हम, 
के जराओत दीप ।। 

3. 
हम हेहरू लिलोह सन, 
तों धेलेँ पी केर संग । 
कंगना झुमका सिंगार कर, 
नहि रहलहुँ चानन सन अंग ।। 

4. 
राइत सियाही लेपक' ,
आयल हमर द्वारि ।
निच्छक नयन नोर बह, 
राखत के प्रबोधि परतारि ।।

5. 
परलै पएर तोहर गाममे, 
गमकय सगर दिगंत ।
हमर साराकेँ तुलसी पर, 
जेना आबि गेलैए वसंत ।।

~>✍👤मैथिल प्रशान्त 
   दुर्गौली, बेनीपट्टी । 



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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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