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हमर मिथिला ककरोसँ कम नै

हमर मिथिला ककरोसँ कम नै


✍👤अमित मिश्र


खा कऽ दही चुड़ा चिन्नी, भाँग भरि लोटा पीबी-2
 हे यौ हमरा सन ककरो तँ दम नै 
हमर मिथिला ककरोसँ कम नै -4
1
बाड़ी झाड़ी मे साग फड़ै छै 
नवकी भौजी मखान भुजै छै
हे नीक नीकुत भोजन करी, माँछ पान खा कऽ जीबी-2
हेयौ हमरा सन बाजब नरम नै 
हमर मिथिला ककरोसँ कम नै
2
दरभंगा जयनगर घुमै छी
मंडन अयाचीक गाथा गबै छी
हे तुलसी चौरा सीरा नीपी, गीत विद्यापतिक गाबी-2 
कतौ हमरा सन सीता जनम नै
हमर मिथिला . . . . . . .

कमला कोशी बलान बहैये
अनधन सँ खरिहान भरैये
हमर उगना हमर राम, सबसँ नीक मिथिला धाम- 2
हेयौ हमरा सन ककरो करम नै 
हमर मिथिला ककरोसँ कम नै

गीतकार :-✍👤अमित मिश्र 


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पोस्ट  :- अशोक कुमार सहनी
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