मैथीली छथि मिथिला के मान
💐मैथीली छथि मिथिला के मान 💐
✍👤डॉ. संजीत झा "सरस"
---------------------------------------------------
अज्ञान तमस स लिप्त मनस में
जागल अछि जिज्ञासा ।
किया विकल छथि अपनहि घर में
मधुर मैथिली भाषा ।।१।।
मधुर अहाँ के दिवस देखि क
हमरो जागल मन में आश ।
हमहुँ पुत्र अहीं के मैथिली
हम्मर शान्त करू जिज्ञास ।।२।।
शान्त करू जिज्ञासा
मन अछि बहुते व्याकुल ।
अहाँ किया छी शान्त
यदि हम एत्तेक आकुल ??३??
आ की देखि दुर्दशा घर में
बंद अहाँ के भेल बकार ?
जिनका पाललौं पोसलौं वैह सब
रखलनि नै कोनो सरोकार ??४??
की करबै कलियुग अछि जननी
सबटा ओकरे कैल तमाशा ।
अंग्रेजी पढ़ि सब भेल विलायती
बिसरल अप्पन माय के भाषा ।।५।।
गर्भहि स जे भाषा सुनलक
तकरा लोक कोना के बिसरल ?
हमरा जनैत हे मधुरा वाणी
ताईं अप्पन मिथिला अछि पिछड़ल।।६।।
पलला बढला जे मिथिला में
तिनको दिल्ली बम्बई आशा ।
अंग्रेजी हिन्दी अछि पसरल
बिसरल सब आई अप्पन भाषा ।।७।।
ओ भाषा जे मधुर सरल अछि
जै में प्रेमक रंग भरल अछि ।
मातृगर्भ स निकलल शिशु के
जाहि भाषा क्रन्दन निकलल अछि ।।८।।
ओहि भाषा के मान नै घर में
माय बापक सम्मान नै घर में ।
धिया पुता हिंगलिश बाजै छथि
मैथिली के अपमान अछि घर में ।।९।।
आग्रह हमर हे मैथिल प्रियजन
रहू ओतै जतय वृत्तिक आशा ।
दिल्ली कलकत्ता बम्बई रहितो
घर में बाजू अप्पन भाषा ।।१०।।
कहथि सरस कर जोरि सुनै जाउ
अपनहि भाषा स पहचान ।
धन मैथिली जे हम सब मैथिल
हुनकर नै करियौन अपमान ।।११।।
हुनकर नै करियौन अपमान
आबो करू हुनकर सम्मान ।
घर घर गूँजथि भाषा अप्पन
मैथिली छथि मिथिला के मान ।।१२।।
मैथिली छथि मिथिला के मान ।
मैथिलीये मिथिला के जान ।।👏👏।।
लेखक ..✍👤 डॉ. संजीत झा "सरस"
(२१/०२/२०१७)
💝💝💝💝💚💙💙💝💝💝
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
💗💗💗💗💗💗💗💗💗💗
🚩🚩🚩

कोई टिप्पणी नहीं