अपन गाम सुन्दर धाम
🏯अपन गाम सुन्दर धाम 🏯
✍👤रामबाबू सिंह
ऐना हमरा मोन में
कहियो विचार नहि आएल
गामक सन्दर्भ में......
गाम तँ गाम होयत अछि
ओ कतय जाएत
ठहरि गेल अछि
अटकि गेल अछि
अपन धुरी पर
सदा सर्वदा सँ एक सम वंदनीय
हमरा रहने या नहि रहने
हुनका पर कोनो फरक नहि पड़ैत
अनुभूति होयत अछि
हम दिल्ली आबि गेलहुँ
सुधि बुद्धि बिसारि
गामक पावनि तिहार
संगी सखा के छोड़ि
कोल्हुके बरद जेकाँ
अपनहि बनाएल धुरी पर
गोल गोल घुमैत रहलहुँ
छुटि गेल अप्पन पराड़
मुदा अहि महानगर के
ओतबो फरक नहि पड़लै जतेक
गामक कुकुड़ बिलाय गाय महिंसक
अएला गेला सँ पड़ैत अछि
नहि सुनल कनीओ चर्चा एतय
जीवकोपार्जन लेल
कोना लड़ैत अछि
अहि शहर में एकगोट कवि
जीवन के अस्सी वरख देलखिन
मुदा जखन ओ दिवंगत भेलाह
तखन अस्सी गोट लोक नहि
अंतिम संस्कार में देखल गेलाह
कवि के अंत समयक स्मरण सँ
मोनक वेदना असह्य भ गेल
शहर में लोक के आत्मीयता नहि
पहिने बटुआक संपन्नता
ओहि में भरल पुरल माया
ताहि सँ केवल सोझा में ठाड़ भ
बनि सकै छथि मृत आत्माक छाया
आब जखन जुआनी सँ बुढ तक
पूरा उमेर शहर में काटि देलहुँ
जतय कखनो किनको हमरा अएला सँ
नहि होय छलनि अपनापन
आ चलि गेला सँ नहि किनको खालीपन
निशक्त देह लS आब गाम जाकS
अपन हृदय में बहुते रास
मनोभाव के सजाकS रखने छी
कतय बाजब के सुनत
शांत मोन में उड़ैत हरविरो के
कोना कियो पढ़त
कल्पनाक अथाह सागर में
भासैत जा रहल छी
भीजल नयन सँ अपनहि
जीवन यात्राक गीत
गाबैत जा रहल छी
गाम तँ गाम होयत अछि
सभटा धाम सँ पैघ धाम होयत अछि
एकर समकक्ष कोनो नाम नहि
गामहि में अन्तर्मनक
विश्राम होयत अछि....
✍👤रामबाबु सिंह
अपन गाम..सुन्दर धाम..मधेपुर गाम
#चैती_दुर्गापूजा_समिति_मधेपुर/कलश यात्राक फोटो सब
#जयमाता_जी_जयमिथिला_जयमैथिली।
🌼🌼🌻🌼🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌼🌻🌼🌻🌼🌻
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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✍👤रामबाबू सिंह
ऐना हमरा मोन में
कहियो विचार नहि आएल
गामक सन्दर्भ में......
गाम तँ गाम होयत अछि
ओ कतय जाएत
ठहरि गेल अछि
अटकि गेल अछि
अपन धुरी पर
सदा सर्वदा सँ एक सम वंदनीय
हमरा रहने या नहि रहने
हुनका पर कोनो फरक नहि पड़ैत
अनुभूति होयत अछि
हम दिल्ली आबि गेलहुँ
सुधि बुद्धि बिसारि
गामक पावनि तिहार
संगी सखा के छोड़ि
कोल्हुके बरद जेकाँ
अपनहि बनाएल धुरी पर
गोल गोल घुमैत रहलहुँ
छुटि गेल अप्पन पराड़
मुदा अहि महानगर के
ओतबो फरक नहि पड़लै जतेक
गामक कुकुड़ बिलाय गाय महिंसक
अएला गेला सँ पड़ैत अछि
नहि सुनल कनीओ चर्चा एतय
जीवकोपार्जन लेल
कोना लड़ैत अछि
अहि शहर में एकगोट कवि
जीवन के अस्सी वरख देलखिन
मुदा जखन ओ दिवंगत भेलाह
तखन अस्सी गोट लोक नहि
अंतिम संस्कार में देखल गेलाह
कवि के अंत समयक स्मरण सँ
मोनक वेदना असह्य भ गेल
शहर में लोक के आत्मीयता नहि
पहिने बटुआक संपन्नता
ओहि में भरल पुरल माया
ताहि सँ केवल सोझा में ठाड़ भ
बनि सकै छथि मृत आत्माक छाया
आब जखन जुआनी सँ बुढ तक
पूरा उमेर शहर में काटि देलहुँ
जतय कखनो किनको हमरा अएला सँ
नहि होय छलनि अपनापन
आ चलि गेला सँ नहि किनको खालीपन
निशक्त देह लS आब गाम जाकS
अपन हृदय में बहुते रास
मनोभाव के सजाकS रखने छी
कतय बाजब के सुनत
शांत मोन में उड़ैत हरविरो के
कोना कियो पढ़त
कल्पनाक अथाह सागर में
भासैत जा रहल छी
भीजल नयन सँ अपनहि
जीवन यात्राक गीत
गाबैत जा रहल छी
गाम तँ गाम होयत अछि
सभटा धाम सँ पैघ धाम होयत अछि
एकर समकक्ष कोनो नाम नहि
गामहि में अन्तर्मनक
विश्राम होयत अछि....
✍👤रामबाबु सिंह
अपन गाम..सुन्दर धाम..मधेपुर गाम
#चैती_दुर्गापूजा_समिति_मधेपुर/कलश यात्राक फोटो सब
#जयमाता_जी_जयमिथिला_जयमैथिली।
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| कवि- रामबाबू सिंह जी |
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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