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गोरिया पीटै छै कपार (फगुआ गीत)

फगुआ गीत 
गोरिया पीटै छै कपार 
--(क्रमश:)-

✍👤अमरनाथ झा "अमर"
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गोरिया पीटै छै कपार,
फगुओ नै अयलै सजनमा ।

फूलल कुसुम,पलाश अंगोर
मौसिम  लागै  ताप  इन्होर
चढ़ल मदन बोखार ,      
टूटै सगरो बदनमा ।

एक त' पछबा देह जराबै
दछिन पवन तैपर दुलराबै
कोना रहतै सम्हार,    
उमरल भार जोबनमा ।

छलै अबैया,कहिके गेलै
चोरानुका के बाटो हेरै
ननदो करैछै देखार ,
ओकरोने होइछै गवनमा ।

करै प्रतीक्षा भेल सुसज्जित
देखिदेखि अपनाके लज्जित
तैपर कनखी मार ,
देबरो  बहुत  शैतनमा ।

नोकरी त' जिनगी के खेला
जौवन चारि दिनुक छै मेला
केहेन भेलै गमार ,
बतियो ने बूझै बैमनमा ।

गोरिया पीटै छै कपार,
फगुओ ने अयलै सजनमा ।

✍👤अमरनाथ झा"अमर"
  ०५/०३/२०१७।
गीतकार :- अमरनाथ झा "अमर" जी














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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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