होली (जीवन मे रंग)--
होली (जीवन मे रंग)--
✍👤मणिकान्त झा
लाल,गुलाबी,पियर रंग,
मलल गेल अछि अंग-अंग,
छौड़ा आ' जुअनका कऽ के कहैय यँ,
देखि कारसतानी दाँत टुट्टा बुढ़वा के ,
रहि गेलहूँ हमहूँ, दंग,यौ भाई सब।
रहि-- --
छौड़ी आ' मौगी से आगू भँ,
बुढ़ियों ठुमैक रहल अछि मस्त,खा के भंग,
सब पर चढ़ल छैक आय,फौगक रंग।
सब ---
सबहक एके मक़सद,लगाबैक
प्रेमक रंग,
सब भँ गेल अछि आय ,मस्त मलंग,
जोगीरा के संगे बाजि ,
रहल अछि ढोल- मृदंग,
नेना- भुटका के संगे अगत्ती छौड़ा ,
मचा रहल अछि, चौक-चौराहा पर
हुदंग । मचा
मोनक मोर ,गाबि रहल अछि फौगक राग,
रंग अल्हड़, लअ के आयल फेर से फाग,
पैघ -छोटक बीच,मेटा देलक ओ मोनक दाग,
एके थारी मे बैसि,सब खा रहल अछि प्रेमक साग,
फेर से गमैक उठल अछि समाजक फाग,
फुजि गेल ,मिथिला के भाग्य । फुजि --
प्रेमक पिचकारी बरसाऽ रहल अछि
मोहक रंग,
कियो नैं अछि ग़ैर आब,
घुसूँ पड़ोसीक घर मे, ककरो सँ नैं
अछि बैर,
नैं खेलताह जे होली,हुनकर नैं
छनि ,आब ख़ैर ।
सबहक मुँह पर अछि मधुर मुस्कान,
हम सब छी, एके के सन्तान ,
एक-दोसर के करू, सम्मान,
होली के रंग मे रंगल अछि पूरा गाम । रंगल--
प्रेमक नशा सऽ पैघ ,नैं छैक कोनो
नशा,
ओकर बूट्टी खा के,बदलू समाजक
दशा । यौ बदलू--
-----मणिकान्त झा---- ५.०३.२०१७
होलीक अग्रिम शुभकामनाक संग,
सबहक जिनगी मऽ रहाय प्रेमक रंग,
💚💚💚💚💚💚💓💓💓💓🌻🌻🌻🌻
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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✍👤मणिकान्त झा
लाल,गुलाबी,पियर रंग,
मलल गेल अछि अंग-अंग,
छौड़ा आ' जुअनका कऽ के कहैय यँ,
देखि कारसतानी दाँत टुट्टा बुढ़वा के ,
रहि गेलहूँ हमहूँ, दंग,यौ भाई सब।
रहि-- --
छौड़ी आ' मौगी से आगू भँ,
बुढ़ियों ठुमैक रहल अछि मस्त,खा के भंग,
सब पर चढ़ल छैक आय,फौगक रंग।
सब ---
सबहक एके मक़सद,लगाबैक
प्रेमक रंग,
सब भँ गेल अछि आय ,मस्त मलंग,
जोगीरा के संगे बाजि ,
रहल अछि ढोल- मृदंग,
नेना- भुटका के संगे अगत्ती छौड़ा ,
मचा रहल अछि, चौक-चौराहा पर
हुदंग । मचा
मोनक मोर ,गाबि रहल अछि फौगक राग,
रंग अल्हड़, लअ के आयल फेर से फाग,
पैघ -छोटक बीच,मेटा देलक ओ मोनक दाग,
एके थारी मे बैसि,सब खा रहल अछि प्रेमक साग,
फेर से गमैक उठल अछि समाजक फाग,
फुजि गेल ,मिथिला के भाग्य । फुजि --
प्रेमक पिचकारी बरसाऽ रहल अछि
मोहक रंग,
कियो नैं अछि ग़ैर आब,
घुसूँ पड़ोसीक घर मे, ककरो सँ नैं
अछि बैर,
नैं खेलताह जे होली,हुनकर नैं
छनि ,आब ख़ैर ।
सबहक मुँह पर अछि मधुर मुस्कान,
हम सब छी, एके के सन्तान ,
एक-दोसर के करू, सम्मान,
होली के रंग मे रंगल अछि पूरा गाम । रंगल--
प्रेमक नशा सऽ पैघ ,नैं छैक कोनो
नशा,
ओकर बूट्टी खा के,बदलू समाजक
दशा । यौ बदलू--
-----मणिकान्त झा---- ५.०३.२०१७
होलीक अग्रिम शुभकामनाक संग,
सबहक जिनगी मऽ रहाय प्रेमक रंग,
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| लेखक - मणिकान्त झा जी |
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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