मोहरात्रि
मोहरात्रि
श्रीकृष्ण-जन्माष्टमी के रात्रि कें मोहरात्रि कहल जाइछ। एहि राति में रात में प्रभु श्रीकृष्ण केर ध्यान, नाम अथवा मंत्र जपैत जगला सँ संसारक मोह-माया सँ आसक्ति हटैत छैक। जन्माष्टमी केर व्रत व्रतराज थिकै। एकर सविधि पालन सँ अनेक व्रत सँ प्राप्त होमय वाला महान पुण्य राशिप्राप्त क'अ लेब।
व्रजमण्डलमें श्रीकृष्णाष्टमी के दोसर दिन भाद्रपद-कृष्ण-नवमी में नंद-महोत्सव अर्थात् दधिकांदौ श्रीकृष्ण के जन्म लेबाक के उपलक्ष में हर्षोल्लासक संग मनाओल जाइत छैक। भगवान के श्रीविग्रहपर हरैद, दही, घी, तेल, गुलाबजल, माखन, केसर, कपूर आदि चढा कय ब्रजवासी ओकर परस्पर लेपन आ छिडकाव करैत छथि। वाद्ययंत्र सँ मंगलध्वनि बजाओल जाइत छैक आ भक्त सबहक द्वारा मिठाई बांटल जाइछ। जगद्गुरु श्रीकृष्ण केर जन्मोत्सव नि:संदेह सम्पूर्ण विश्व के लेल आनंद-मंगल केर संदेश दैत अछि।
क्रमशः
साभार - संस्कार मिथिला पेज सँ
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