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आंगन ठाढ़ सेवक सुत हे

आंगन ठाढ़ सेवक सुत हे
माँ करहु पुछारि-२
महिमा तोरहि अद्भुत हे
सुधि लएहु विचारि
आंगन ठाढ़...............

परम पतित तुअ संतति हे
नहिं बोध गोहारि-२
रण-बण छानि हकासल हे
ऐल अधम दुआरि
आंगन ठाढ़................

दिवस गमए बिनु कारज हे
क्षण-क्षण कटि काहि-२
कुपित हिया अति व्याकुल हे
जनु उठल उजाहि
आंगन ठाढ़..................

अरजल पुरुव जनम केर हे
भेटए लगि पाहि-२
विधि केर रेघ ने सम भेल हे
करमहुँ देल जाड़ि
आंगन ठाढ़...................

मेटबहु दोख करम गति हे
जुनि देहु बहटारि-२
निज संतान उबाड़हु हे
विपदा निपटारि
आंगन ठाढ़..................

                              ✍ अमित पाठक

साभार .संस्कार मिथिला पेज

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