एक गरिब बेटी के पुकार
।। बाबू यौ हमरा पढ' दिअ ।।
धनिकऽकऽ बेटी भेलै सियानी ,
पढि लिखकऽ भेलै ओ ज्ञानी !
तें अक्षर - अक्षर जोड' दिअ ,
बाबू यौ हमरा पढ' दिअ !!
हमरा पऽ करू अहाँ आसा ,
नै करब हम अपनेकें निरासा !
डेगे - डेग सिढी चढ' दिअ ,
बाबू यौ हमरा पढ' दिअ...!!
पढि - लिख कऽ होतै ज्ञान ,
भविष्यमे उडाएब हमहूं विमान !
अपन कपार सँ लऽड दिअ ,
बाबू यौ हमरा पढ' दिअ !!
गरीबी अछि जिनगी कें हिस्सा ,
धनिकऽ कें लागै सुन' मे खिस्सा !
तें हमरो आगा बढ' दिअ ,
बाबू यौ हमरा पढ' दिअ !!
कहैए राजदेब सुनू हमर बात ,
बालश्रम केर मारु लात !
बुद्धि -विद्या ग्रहण कर दियौ ,
बगरीया यौ बौवा के पढ' दियौ !!
लेखक : राजदेब राज
ठेगाना : चोहर्वा सिरहा ( नेपाल )
हाल : मलेशिया
पढि लिखकऽ भेलै ओ ज्ञानी !
तें अक्षर - अक्षर जोड' दिअ ,
बाबू यौ हमरा पढ' दिअ !!
हमरा पऽ करू अहाँ आसा ,
नै करब हम अपनेकें निरासा !
डेगे - डेग सिढी चढ' दिअ ,
बाबू यौ हमरा पढ' दिअ...!!
पढि - लिख कऽ होतै ज्ञान ,
भविष्यमे उडाएब हमहूं विमान !
अपन कपार सँ लऽड दिअ ,
बाबू यौ हमरा पढ' दिअ !!
गरीबी अछि जिनगी कें हिस्सा ,
धनिकऽ कें लागै सुन' मे खिस्सा !
तें हमरो आगा बढ' दिअ ,
बाबू यौ हमरा पढ' दिअ !!
कहैए राजदेब सुनू हमर बात ,
बालश्रम केर मारु लात !
बुद्धि -विद्या ग्रहण कर दियौ ,
बगरीया यौ बौवा के पढ' दियौ !!
लेखक : राजदेब राज
ठेगाना : चोहर्वा सिरहा ( नेपाल )
हाल : मलेशिया

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