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गरीबक बेटा भूख से तड़पैय त,सब के चोर लगैया ।

धनिकहक घर के कौवा सब के मोर लगैया,
गरीबक बेटा भूख से तड़पैय त,सब के चोर लगैया ।

किया बनेला एहन रीत हे बिधाना,
जिनगी में दुःख के सिबा देला किछ ना ।

धनिहाक घर में सोर सराबा ,
सब के चाँद चकोर लगैया ।
गरीबक बेटा भूख से तड़पैय त ,
सब के चोर लगैय ।

कलयुग में गरीबक बिनती के सुनैया,
सब सुनैया रुपैया के ,
कतेको बिनती किया नै कलू,
धनिक नै पूछत गरीब भैया के,
धनिक के घर में हँसी खुसी,
जिनगीक डोर लगैय ।।
गरीबक बेटा कनैय त सब के बहुत शोर लगैय ,,

धनिकहक़ घर के कौवा सब के मोर लगैय,
गरीबक बेटा भूख से तड़पैय त सब के चोर लगैय ।

लेखक✍अहमद रेज़ा
  हाँसपट्टी ८ धनुषा
हॉल(दोहा क़तार)

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