आय भोरे सँ माँ दुर्गा के खोइछ भरै रहल अछि ( फोटो के साथ में)
आय भोरे सँ माँ दुर्गा के खोइछ भरै रहल अछि
✍अशोक कुमार सहनी अपन मिथिला , लहान असोज २३।
अष्टमीके दिन आय मिथिलाक स्त्रीसब सौभाग्यवती आ सन्तानके कामना करैत देवी दुर्गा भवानीके ‘खोइछ’ भरै के विधि करहल अछि ।
दशमी सुरू भेल तबसे देवी दुर्गाके उपास करैत
आएल विवाहित मैथिल स्त्री दुइब अक्षत, फल, हरदी, सुपारी, पान आ सोन,पैशा के खोइछ देवी दुर्गाके आँचर में चढाबैत मिथिला के पराम्परा विधिके निरन्तर दैत आरहल अछि ।
भगवती दुर्गा असोज शुक्ल प्रतिपदाके दिन नैहर ऐल नौ दिनतक रहल आ दशमीके दिन ससुराइर जाय छै से धार्मिक मान्यताकके कारण ‘खोइछ’ भरै के कहाबत छै।
मिथिलाञ्चलके पुरानका परम्परा रहल ई विधि पूरा करै केलेल राईतसँ शक्तिपीठ, देवीमन्दिरमें विवाहित मैथिल नारी सब के भीड़ लागल अछि ।
ओर देवी दुर्गाके नया बनल मूर्ति में आँखा खोलैके विधिससेहो समापन भेल अछि। अपन मिथिला में माईंट के बनल देवी दुर्गाके मूर्ति अष्टमीके दिन बेलके डाँठ सँ आँखा खोलैके चलन अछि ।
✍अशोक कुमार सहनी
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| खोइछ लेने मिथिलानी नारी |
✍अशोक कुमार सहनी अपन मिथिला , लहान असोज २३।
अष्टमीके दिन आय मिथिलाक स्त्रीसब सौभाग्यवती आ सन्तानके कामना करैत देवी दुर्गा भवानीके ‘खोइछ’ भरै के विधि करहल अछि ।
दशमी सुरू भेल तबसे देवी दुर्गाके उपास करैत
आएल विवाहित मैथिल स्त्री दुइब अक्षत, फल, हरदी, सुपारी, पान आ सोन,पैशा के खोइछ देवी दुर्गाके आँचर में चढाबैत मिथिला के पराम्परा विधिके निरन्तर दैत आरहल अछि ।
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| खोइछ भरैत मिथिलानी सब |
भगवती दुर्गा असोज शुक्ल प्रतिपदाके दिन नैहर ऐल नौ दिनतक रहल आ दशमीके दिन ससुराइर जाय छै से धार्मिक मान्यताकके कारण ‘खोइछ’ भरै के कहाबत छै।
मिथिलाञ्चलके पुरानका परम्परा रहल ई विधि पूरा करै केलेल राईतसँ शक्तिपीठ, देवीमन्दिरमें विवाहित मैथिल नारी सब के भीड़ लागल अछि ।
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| बेल तोदैत |
ओर देवी दुर्गाके नया बनल मूर्ति में आँखा खोलैके विधिससेहो समापन भेल अछि। अपन मिथिला में माईंट के बनल देवी दुर्गाके मूर्ति अष्टमीके दिन बेलके डाँठ सँ आँखा खोलैके चलन अछि ।
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| माँ दुर्गा के मूर्ति |
✍अशोक कुमार सहनी




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