मइया हम सजायब अहाँ कें श्रृंगार।
दुर्गा पुजाकें धुम मचल छै त चलै चलु मैयाकें दरबार सजाब मैयाकें श्रृंगार ,त प्रेम सं कहियौ जगत जननी मैया की जय।
।।माँ केँ श्रृंगार॥
----देवी गीत-----
✍,सुबोध चौधरी
ध्यान धऽकऽ एलौं, भाव लऽकऽ एलौं,
मैया करियौ ने पुजा स्वीकार,
हम सजायब अहाँ कें श्रृंगार।
*
मैया केँ चुनरी मे गाँथल छै मुनरी,
ओढ़थिन मैया त लागथिन बढ़ सुनरी।
माँ केँ चुनरी केँ कोर करतै जग मे इजोर
जग सँ छंटि जेतै पसरल अन्हार।
हम सजायब.......
*
लौने छी पायल चांदी गढ़ायल,
छन-नन छन-छन बाजतै इ पायल।
सुनि'क पायल केँ शोर हेतै मन इ बिभोर,
मेटतै माँ सब केँ मन केँ विकार।
हम सजायब........
*
अहाँ केँ ललना आनने या कंगना
कंगना पहिर'क मैया ऐबै जँ अंगना।
दिन दुःख केँ जेतै प्रात सुख केँ हेतै,
'सुबोध' जिनगी केँ हेतै उद्धार।
हम सजायब.........
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✍सुबोध चौधरी।
।।माँ केँ श्रृंगार॥
----देवी गीत-----
✍,सुबोध चौधरी
ध्यान धऽकऽ एलौं, भाव लऽकऽ एलौं,
मैया करियौ ने पुजा स्वीकार,
हम सजायब अहाँ कें श्रृंगार।
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मैया केँ चुनरी मे गाँथल छै मुनरी,
ओढ़थिन मैया त लागथिन बढ़ सुनरी।
माँ केँ चुनरी केँ कोर करतै जग मे इजोर
जग सँ छंटि जेतै पसरल अन्हार।
हम सजायब.......
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लौने छी पायल चांदी गढ़ायल,
छन-नन छन-छन बाजतै इ पायल।
सुनि'क पायल केँ शोर हेतै मन इ बिभोर,
मेटतै माँ सब केँ मन केँ विकार।
हम सजायब........
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अहाँ केँ ललना आनने या कंगना
कंगना पहिर'क मैया ऐबै जँ अंगना।
दिन दुःख केँ जेतै प्रात सुख केँ हेतै,
'सुबोध' जिनगी केँ हेतै उद्धार।
हम सजायब.........
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✍सुबोध चौधरी।

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