येहेन चान्दनी राइतमे आनहार भेलै आइ
✍बिनोद मेहता
आशे आशमे बैठल बैठल निराश भेलियै आइ ।
हम दुई दिनक जिन्दगीमे बेकार भेलियै आइ ।।
किय हमर मोन तडपैत रहल छै ,
येहेन चान्दनी राइतमे आनहार भेलै आइ ।।।
✍बिनोद मेहता
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पोस्ट -: अशोक कुमार सहनी
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