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पिया आबि जाउ अंगना

दिन राइत खनकय कंगना।पिया आबि जाउ अंगना।


✍मैथिल प्रशान्त 

हमर मोन मोन हुलसय । हमर ठोर ठोर बिहुंसय ।।
दिन राइत खनकय कंगना।पिया आबि जाउ अंगना।।
पिया आबि जाउ अंगना......


भूतिया  गेल  छी  हम,  अहाँके  सोहमे  यौ ।
नैहर ने नीक लागय, पिया अहाँके मोहमे यौ ।।
मारैए ताना हमरा, आब त' हमर बहिना ।
पिया आबि जाउ अंगना........

बिसरि   कोना   गेलियै ,  अपन प्राणके अहाँ ।
सून  मसान   केलियै ,  हिय' दलानकेँ  अहाँ ।।
ल' लिय' छुट्टी, आबि जाउ गाम सजना ।
पिया आबि जाउ अंगना......

चेहा  उठै  छी  हम ,  बाजै  मोबाइल  ककरो ।
फोन लागय पी के, करी नंबर डाइल ककरो ।।
ने दिवस कटैए हमर, कटय राइत कहुना ।
पिया आबि जाउ अंगना....




लेखक__✍मैथिल प्रशान्त
  दुर्गौली, बेनीपट्टी ।

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पोस्ट:- अशोक कुमार सहनी
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