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खेलु खेलु यौ भैया बाजी लगाइ के

खेलु खेलु यौ भैया बाजी लगाई के





✍भारती रामानन्द 

खेलु  खेलु  यौ   भैया   बाजी  लगाइ के
         सीता  जीतथिन  रामजी  हारथि बाजी  लगाइ के

           सखी  सब  देथि  पिहकारी  बाजी  लगाइके  सीता  हारथि राम जी  जितथि बाजी  लगाइके

                  सखी  सब गेला   लजाय  बाजी  लगाइ के  धन्य धन्य सखी  हम  मिथिलावासी

          राम जी  भेला  जमाइ  बाजी  लगाइ  के  जुआ  खेलै  लेल  एला  जनकपुर बाजी  लगाइ के

  हारला  माय बहिन पितिआइन  हे  बाजी  लगाइ  के

              आइ  भैया के छियनि कोजेगरा  हे  पुर्णिमाक राति  कथिक जुता   कथी  के  छत्ता  कि  पहिरि क चलता हे  पुर्णिमा के राति

           सोनेक जुत्ता  रुपे  के  छत्ता झुनकी खराम   चढि चलता  हे पुर्णिमाक राति

      कथि केरे  थारी  कथीकेर कौडी  किनका  संग पचीसी  खेलता हे  पुर्णिमा  के  राति

     सोनाक थारी   चानीक कौडी  भौजी  संग  खेलता  पचीसी  हे पुर्णिमां के राति

  ✍भारती रामानन्द



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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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