सोरह-श्रङ्गारमे एलौ,पहिले दिन कॅलेज राधा
सोरह-श्रङ्गारमे एलौ,पहिले दिन कॅलेज राधा
✍विधानन्द वेदर्दी
सोरह-श्रङ्गारमे एलौ,पहिले दिन कॅलेज राधा
छिनिके ल' गेलौ अहाँ,सबटा हमर नॅलेज राधा॥
देखिके चन्द्रमुखी सन सोहाओन सुरति अहाँके,
एक्कहि झटकामे,दिमागक बत्ती भेल फेज राधा॥
ई नजरि सँ ऊ नजरि अनचोकेमे मिलि गेलै तब,
धकधक धड़कलै अगवे जोर सँ, ई करेज राधा॥
मारलौ जे मुस्की चौवनी,शरीरक नसनस टुटल
कहिया करबै कहुँ प्रेम-पट्टीसँ व्याण्डेज राधा?
विआहक खातीर त' राजीये अछि 'विद्यानन्द',
क' लिय,नै लेत फटफटिया आ नै दहेज राधा॥
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ग़ज़लकार ✍विद्यानन्द वेदर्दी
सप्तरी,राजविराज
हाल- विराटनगर,मोरङ्ग
*2073/08/13
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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