बीहनि कथा ( विअाह)
💐 बीहनि कथा
🐚 विअाह
✍ वी०सी०झा"बमबम"
~ हँ हेल्लो बउआ ! सूनए छऽ ?
~ हँ ! बाबू कहियहु ने ? हम सूनए छी !
~ कहलिऽ जे टिकस कटा कऽ गाम चलि आबह !
~ एखन त गाम सऽ ( छठि'क प्राते ) अएबे कयल रहि ? आ लगले - - -
~ हम जे कहय छियह से बूजहक ने , आ तों चूप चाप गाम आबह !
~ परंच एखन तऽ गाम एयवा'क कोनो तूके नहि बनैत अछि !
~ तूक आब साफ - साफ साफ बूजहक जे तोहर हम विआह ठीक कए देलिऽ !
~ आंय ! एना केना हमरा बिनु पूछनहि ठीक कय देलहु ?
~ एहि मे हम तोरा सऽ कि पूछिबह ? हम तोहर बाप छियह एतेक तऽ हमरा अधिकार अछि !
~ से तऽ ठीक छय परंच - - - - ?
~ परंच कि ? विआहक नाम सुनतहि लोक नाचय लगैत अछि ! आ तों एना किआ नाक भांगय छंऽ ?
~ नाक आ कान भांगय बला बात नहि छहि बाबू !
~ तखन कि तोहर विचार छहु ओम्हरे कतहु - - - ! हमर जाति गमेबऽ कि ?
~ अरे अहुं कि सोचैत रहय छी ? एखन हमर वयस भेल विआह करवा जोग ? एहि स हमरा बोझ बढ़त आ हमर भविष्य चौपट भ जायत पढ़ाइ लिखाइ सब खतम भऽ जायत !
~ तों हमर बाप जकाँ बात कम कर , इ नहि बिसर जे हम तोहर बाप छियहु, तों हम्मर नहि ?
एंऽ रउ चाणक्य'क विआह :- १२ बरख मे , राजेन्द्र प्रसादक :- १३ बरख में आ अम्बेडकर के :- ११ बरख मऽ भेल रहनि , हुनकर सबहक भविष्य आ पढ़ाइ - लिखाई चौपट भेलनि ? कि आर उज्वले भऽ गेलनि !
~ ओ समय दोसर छलहि बाबू ! आब समय बदलि गेलहि !
~ हँ से तों ठीके कहैत छंऽ जे समय बदलि गेलय पहने लोक के धाख छलहि आ आब'क छौंड़ा - छौड़ी सब विआह सऽ पहिनहि एना करैत अछि तेना पहिलुका लोक विआह'क बादो नहि करैत छल ! छिआ - - छिआ - - - तोंहु लगय य - - - -
~ हेल्लो ऽ- हेल्लो ऽ- हेल्लो ऽ ऽ ऽ बाबू बाबू ऽ ऽ
( तामे फोन कटि गेल रहय छै )
लेखकः-✍ वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
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पोस् :- अशोक कुमार सहनी
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पोस् :- अशोक कुमार सहनी
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