भैया सहिद -भौजी परदेशी
भैया सहिद -भौजी परदेशी
मैथिलि अनुवाद✍👤 विन्देश्वर_ठाकुर
पहिल बर्ष -
एम्हर खाडीमे भैया पसिना बेचैछै
किनैछै किछु थान जिन्सी सपना
आ खजुरके गाछ देखिक'
अपन भुख मेटबैछै ।
ओम्हर जनकपुरमे भौजी -
चुल्हीमे खौलबैछै
भटरंग पानिसंग भैयाक याद
खूब क' सरापैछै अन्हरिया रातिके
बौवाबुच्चीसब सेहो नैनमे सजबैछै
दशमीक नवका कपडा
आ देख' लगैछै
नानीगाम जएबाक सुन्नर बाट ।
एकबर्ख बाद -
घाम सुखाएल छै भैयाक देहमे
गुम्साइन महकैछै इरानी मार्केटके
पचास रियाल बला अत्तर
केश जेल सँ ठाड बनौने छै
आँखिमे छै नक्कली रेवनके चस्मा
चौरचनके लेल पैसा पठाक'
किनल आधा जुठि सेउ छै ।
ओम्हर जनकपुरमे -
भौजीके नाकमे छै बुलकी
गरामे लटकल छै सोनाके सिकरी
लाले/पियर भेल देह छै
बौवासबहक नाकमे नकटी बैसल छै
तथापी -
अभाव आ गरीबि
डेरा सारि लेने छै ।
भैया एखन -
खाडीमे नेता बनल छै
भाषण करैत फिरैछै सब शुक्र दिन
सरकारके सात पुस्ता तक हौंर दैछै
कखनो गणतन्त्र आ संघियताक
त कखनो अखण्ड नेपालके बात करैछै
ओतबे कहाँ !
कखनोक' त ओ -
राज्य संग सोझे देश मंगैछै ।
बदैल गेल छै भौजीक चेहरा
सोझ बना लेने छै घुरमल केश
साडी बलाउज त आब नैहरे ध' आएल छै
रहैछै सदिखन सिटसाटेमे व्यस्त
नित राति बिछौनापर एकटा तरेगण खसैछै
आ
भोरका शीतसंगे सेनुरक ललका रंग
भैयाक अस्तित्व खोजैछै ।
दू बर्ख बाद -
भैया कोट टाईमे राजधानी अबैछै
शहर उजाड भेल छै
भैया बौक भऽ जाइछै
साँझुक बेर
बागबजारके भट्टिमे पैसलाक बाद
भैया बिसरि जाइछै
अरबक गर्मी आ खजुरके गाछ
घरक घरणी आ बौवाबुच्चीसब ।
भैया -
टहलैत टहलैत घरके अंगनामे अबैछै
एलएम सिग्रेट निकालिक' धरबैछै
घर उदास आ ओसोरा उदास लगैछै
ओलतीमे नेप ढारैत बुच्ची देखैछै
तहन पुछैछै बुच्चीके
बौवा माए क'त गेल ?
भौजी - आइए भोरमे
घोकचल नैनमे जवानी लौलकै
बेटीक लगमे बैसाक' कहलकै
"बेटी बाप एतौ त कहि दिहै
माए बुधना कक्का संगे परदेश गेलो ।"
भौजीक घर छोडल खबर सुनि
भैया सौंसे देश जीतबाक लेल जंगल पैसैत छै
किछु दिन बाद रेडियोसँ समाचार कहैछै
कोसी नदीके किनारमे
आतंककारी विन्देश्वर ठाकुर मरि गेलै ।
#अनुवाद : #विन्देश्वर_ठाकुर
मूल कवि : रेगिस्तानी कवि Tirtha Sangam Rai
खोटाङ - बुईपा
हाल— अन्तर्राष्ट्रिय नेपाली साहित्य समाज कतार च्याप्टर अध्यक्ष
🌷🌷🌷🌷
🌷🌷🌷🌷🌷🔵🔵🔵🔵🔵🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
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मैथिलि अनुवाद✍👤 विन्देश्वर_ठाकुर
पहिल बर्ष -
एम्हर खाडीमे भैया पसिना बेचैछै
किनैछै किछु थान जिन्सी सपना
आ खजुरके गाछ देखिक'
अपन भुख मेटबैछै ।
ओम्हर जनकपुरमे भौजी -
चुल्हीमे खौलबैछै
भटरंग पानिसंग भैयाक याद
खूब क' सरापैछै अन्हरिया रातिके
बौवाबुच्चीसब सेहो नैनमे सजबैछै
दशमीक नवका कपडा
आ देख' लगैछै
नानीगाम जएबाक सुन्नर बाट ।
एकबर्ख बाद -
घाम सुखाएल छै भैयाक देहमे
गुम्साइन महकैछै इरानी मार्केटके
पचास रियाल बला अत्तर
केश जेल सँ ठाड बनौने छै
आँखिमे छै नक्कली रेवनके चस्मा
चौरचनके लेल पैसा पठाक'
किनल आधा जुठि सेउ छै ।
ओम्हर जनकपुरमे -
भौजीके नाकमे छै बुलकी
गरामे लटकल छै सोनाके सिकरी
लाले/पियर भेल देह छै
बौवासबहक नाकमे नकटी बैसल छै
तथापी -
अभाव आ गरीबि
डेरा सारि लेने छै ।
भैया एखन -
खाडीमे नेता बनल छै
भाषण करैत फिरैछै सब शुक्र दिन
सरकारके सात पुस्ता तक हौंर दैछै
कखनो गणतन्त्र आ संघियताक
त कखनो अखण्ड नेपालके बात करैछै
ओतबे कहाँ !
कखनोक' त ओ -
राज्य संग सोझे देश मंगैछै ।
बदैल गेल छै भौजीक चेहरा
सोझ बना लेने छै घुरमल केश
साडी बलाउज त आब नैहरे ध' आएल छै
रहैछै सदिखन सिटसाटेमे व्यस्त
नित राति बिछौनापर एकटा तरेगण खसैछै
आ
भोरका शीतसंगे सेनुरक ललका रंग
भैयाक अस्तित्व खोजैछै ।
दू बर्ख बाद -
भैया कोट टाईमे राजधानी अबैछै
शहर उजाड भेल छै
भैया बौक भऽ जाइछै
साँझुक बेर
बागबजारके भट्टिमे पैसलाक बाद
भैया बिसरि जाइछै
अरबक गर्मी आ खजुरके गाछ
घरक घरणी आ बौवाबुच्चीसब ।
भैया -
टहलैत टहलैत घरके अंगनामे अबैछै
एलएम सिग्रेट निकालिक' धरबैछै
घर उदास आ ओसोरा उदास लगैछै
ओलतीमे नेप ढारैत बुच्ची देखैछै
तहन पुछैछै बुच्चीके
बौवा माए क'त गेल ?
भौजी - आइए भोरमे
घोकचल नैनमे जवानी लौलकै
बेटीक लगमे बैसाक' कहलकै
"बेटी बाप एतौ त कहि दिहै
माए बुधना कक्का संगे परदेश गेलो ।"
भौजीक घर छोडल खबर सुनि
भैया सौंसे देश जीतबाक लेल जंगल पैसैत छै
किछु दिन बाद रेडियोसँ समाचार कहैछै
कोसी नदीके किनारमे
आतंककारी विन्देश्वर ठाकुर मरि गेलै ।
#अनुवाद : #विन्देश्वर_ठाकुर
मूल कवि : रेगिस्तानी कवि Tirtha Sangam Rai
खोटाङ - बुईपा
हाल— अन्तर्राष्ट्रिय नेपाली साहित्य समाज कतार च्याप्टर अध्यक्ष
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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