अंतमे ओहे खाड़ी मुरुभूमि कतार धरा देलौ
{ { { गजल } } }
अंतमे ओहे खाड़ी मुरुभूमि कतार धरा देलौ
✍👤अशरफ़ राईन
मोज मे छल जिनगी दुखक पहाड़ धरा देलौ
लिखबाक छल दर्द आहाँ अखबार धरा देलौ
हम त शायर छलौ हिया बहुत नाजुक छल
कलम मंगने छलौ हाथमे तलवार धरा देलौ
हमरा सँ राजनीती किन्नो नै भ सकत कहियो
जिनगी हमर छै जंग आहाँ सरकार धरा देलौ
कलमक नोक सँ देश बदलबाक इक्क्षा छल
मुदा आहाँ बम बारुध के ब्यापार धरा देलौ
हारि बारि सब काज सँ जखन थाकि गेलौ
अंतमे ओहे खाड़ी मुरुभूमि कतार धरा देलौ
✍अशरफ़ राईन
सिनुरजोडा , धनुषा(नेपाल)
हाल : क़तार ( जुमैलिया )
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
पोस्ट :-अशोक कुमार सहनी
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अंतमे ओहे खाड़ी मुरुभूमि कतार धरा देलौ
✍👤अशरफ़ राईन
मोज मे छल जिनगी दुखक पहाड़ धरा देलौ
लिखबाक छल दर्द आहाँ अखबार धरा देलौ
हम त शायर छलौ हिया बहुत नाजुक छल
कलम मंगने छलौ हाथमे तलवार धरा देलौ
हमरा सँ राजनीती किन्नो नै भ सकत कहियो
जिनगी हमर छै जंग आहाँ सरकार धरा देलौ
कलमक नोक सँ देश बदलबाक इक्क्षा छल
मुदा आहाँ बम बारुध के ब्यापार धरा देलौ
हारि बारि सब काज सँ जखन थाकि गेलौ
अंतमे ओहे खाड़ी मुरुभूमि कतार धरा देलौ
✍अशरफ़ राईन
सिनुरजोडा , धनुषा(नेपाल)
हाल : क़तार ( जुमैलिया )
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पोस्ट :-अशोक कुमार सहनी
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