💞 बीप्रेक ( बीहनि प्रेम कथा ) 💘गुड़-तिल
💞 बीप्रेक ( बीहनि प्रेम कथा )
💘गुड़-तिल
✍🏻 वी०सी०झा"बमबम"
~ हे यउ आबहु उठू ने !
~ किआ हमर सुतब अहाँ कैंऽ छुट्टीयो दिन केऽ नहि सोहाइत अछि ?
~ हे भगवान आब हम कि करब ? आय तिला-सँक्रैत छियै से नहि अहां के बुझल अछि कि ?
~ हं हं से तऽ हमरहु बुछल अछि जे आय तिला-सँक्रैत छियैक ! आजूक दिन छुट्टी अछि तांय निचैन संऽ सुतल छी ने ? नहि तऽ - - - ! ओना कि करब वा नहि करब से भगवान संऽ किआक पूछय छियैन ? जे फूरय से करु ने !
~ हयउ अहाँ उठि कैंऽ नहेवा लेल जाइत छी कि नहि ? कि हम बिछौने पर पानि ढारि दी ?
~ हमर भाग्यवान किआक एतेक तमसाइत छी जाड़ - ठार मे, हम जाए तऽ रहल छी !
~ आह एलहुं नहा-सोना कैंऽ ? आउ बैसु बोरसि लग ! आ हे पहिने इ लिऽ गुड़ -तिल ! आ कहु जहिना बहैत एलहु तहिना बहैत रहब ने ?
~ आंय इ कि ? इ त घरक बर बुजूर्ग माय - बाबी सभ गुर - तिल दय कऽ कहैत छलथि ! आ आय अहाँ ?
~ आब तऽ बुझिते छियै बाल - बच्चा लग मे रहैत नहि अछि जे बहत तखन तऽ अहाँ के हमर तिल भहऽ परबे करत आ हमरा अहाँ केंऽ ! पति परमेश्वर होइत छथि सदिखन नीक बेजाय मे बहैत रहैत छथि ने ?
~ अहिंक बले तऽ हमरहुं जिवनक नाव पार घाट लागि रहल अछि अन्यथा कहिया ने मजधार मे - - - - -!
#एतेक कहैत दुनूक आँखि संऽ प्रेमाश्रु झहरय लगैत छन्हि#
✍🏻 वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤
✔
💘गुड़-तिल
✍🏻 वी०सी०झा"बमबम"
~ हे यउ आबहु उठू ने !
~ किआ हमर सुतब अहाँ कैंऽ छुट्टीयो दिन केऽ नहि सोहाइत अछि ?
~ हे भगवान आब हम कि करब ? आय तिला-सँक्रैत छियै से नहि अहां के बुझल अछि कि ?
~ हं हं से तऽ हमरहु बुछल अछि जे आय तिला-सँक्रैत छियैक ! आजूक दिन छुट्टी अछि तांय निचैन संऽ सुतल छी ने ? नहि तऽ - - - ! ओना कि करब वा नहि करब से भगवान संऽ किआक पूछय छियैन ? जे फूरय से करु ने !
~ हयउ अहाँ उठि कैंऽ नहेवा लेल जाइत छी कि नहि ? कि हम बिछौने पर पानि ढारि दी ?
~ हमर भाग्यवान किआक एतेक तमसाइत छी जाड़ - ठार मे, हम जाए तऽ रहल छी !
~ आह एलहुं नहा-सोना कैंऽ ? आउ बैसु बोरसि लग ! आ हे पहिने इ लिऽ गुड़ -तिल ! आ कहु जहिना बहैत एलहु तहिना बहैत रहब ने ?
~ आंय इ कि ? इ त घरक बर बुजूर्ग माय - बाबी सभ गुर - तिल दय कऽ कहैत छलथि ! आ आय अहाँ ?
~ आब तऽ बुझिते छियै बाल - बच्चा लग मे रहैत नहि अछि जे बहत तखन तऽ अहाँ के हमर तिल भहऽ परबे करत आ हमरा अहाँ केंऽ ! पति परमेश्वर होइत छथि सदिखन नीक बेजाय मे बहैत रहैत छथि ने ?
~ अहिंक बले तऽ हमरहुं जिवनक नाव पार घाट लागि रहल अछि अन्यथा कहिया ने मजधार मे - - - - -!
#एतेक कहैत दुनूक आँखि संऽ प्रेमाश्रु झहरय लगैत छन्हि#
✍🏻 वी०सी०झा"बमबम"
कैथिनियाँ
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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