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गाम मे उगल हेतै चान

💝गाम मे उगल हेतै चान 💗

✍👤सुबोध चौधरी
हम परदेश मे राति कटै छी
जिनगी लागै छै विरान
गांम मे उगल हेतै चान-2
*
सिन्दुर टुकली मांथ लगा क
नेहक मेहँदी हाथ लगा'क
केखनो कोनटा लग मे जा'क
आंखिक काजर नोर बहा'क।
बिधना केहन बनल छै पाथर
बेधने छै बिरहक बान।
गांम मे उगल हेतै चान....
*
पुरबा राति मे सिहकैत हेतै
चान हमर कने झिझकैत हेतै
मन मे यादक दीप जरा क
भीतरे भीतर सिसकैत हेतै।
एहमर ओमहर नजरि घुमा'क
ताकैत हेतै जान।
गांम मे उगल हेतै चान....
*
चान सॅ कनके काल बतिया'क
प्रेम करी हम लग बजा क
झांपल बदरा घोघ हटा क
अपना हिया के हाल सुना'क।
कहितौं हमहुं गांमे रहितौं
सद्खन एकही ठाम।
गांम मे उगल हेतै चान....
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©सुबोध चौधरी।

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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी

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