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मिथिलानी कए सुन्दर मुस्कान (मैथिलि कविता)

मिथिलानी कए सुन्दर मुस्कान (मैथिलि कविता)

छवि साभार मिनु ठाकुर जि के छविपट सँ
✍👤प्रभात पुनम

मिथिलानी कए सुन्दर मुस्कान 
हसि पसरल धर्ती स असमान

                     सरस सालिन मनभावन रुप
                     श्रृङ्गार सजल सुन्दर परिधान 

चानी पिटल तन,सोन सन मोन
तेह्र किएक नहि करि गुमान

                     चन्द्रमुखी धवल अछ आभा
                     उर्वर उर्जा तेजपुँज गतिमान

त्रिभुवन कए त्रीवेनी संगम
गँगा जमुना सरस्वती समान

                    पसरैय राग अनुरागक प्रवाह
                    बढैत रहे मिथिलानी क स्वभिमान

पुर्णमासी कए पुनम कहि कि 
मिथिले मे उतरलिह आजु चान

                     हे मिथिलानी अहि रखने थिकहु 
                     सीता मैथिली जानकी कए मान
रचनाकार :- प्रभात पुनम

लेखकः - प्रभात जी 







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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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