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कान्यादानक महिरम निच्छक बेपारी की जानत

कान्यादानक  महिरम  निच्छक  बेपारी  की जानत


✍👤मैथिल प्रशान्त 

जकरा घर बेटी नहि साम-चकेवा तुसारी की जानत 
कान्यादानक  महिरम  निच्छक  बेपारी  की जानत 

मुट्ठी भरि बाँचल साँस  बेसाहक मुदा छै तोरे बखरा 
अग्गह-बिग्गह मोल छै  रखने नेह बेमारी की जानत 

बाउग  करी  हम बस आसक बिहनि एहि धरती पर 
धांग'वला  खून-पसेना  मेहनतिकेँ तैयारी की जानत 

कतबो  कानब  पसिझत नहिये किए मानि ने लै छी 
पाषाण  हृदय दया-दरेग नै आखर कारी की जानत 

जनक सलहेस याज्ञवल्क्य विद्यापतिकेँ भूमि छै ई 
ज्ञान पसारै सगरो मैथिल से बात बिहारी की जानत 

~> ✍👤मैथिल प्रशान्त 
  दुर्गौली, बेनीपट्टी ।

लेखकः- मैथिल प्रशान्त जी







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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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