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कोइली जखन कुहकल मोन परलै अपन क्यो


💐 कोइली जखन कुहकल मां परलै अपन क्यो  🌼



✍👤 मैथिल प्रशान्त

कोइली जखन    कुहकल  मोन  परलै अपन क्यो 
अधा रातिये नीन कचकल मोन  परलै अपन क्यो 

धूनिसँ लेभरल भोरमे पसरल फूल छै सिंगरहारक 
बेमत  पवन नहुए सिहकल मोन परलै अपन क्यो

कारी केश कते नम्हर सियाही  मेघमे जेना पोतल 
बिहुँसै की बिजुरी चमकल  मोन परलै अपन क्यो 

दुनू ई आँखि छै  जेना  कोनो आन गामकेँ पोखैर 
अथाह जल सर्द  जमकल  मोन परलै अपन क्यो 

चैतमे गाछो पहिर लेलकै हरियर कचोर नव पल्लव 
अहीं सन देखि भाव बरकल मोन परलै अपन क्यो 

~> मैथिल प्रशान्त 
  दुर्गौली, बेनीपट्टी ।.


कवि- मैथिल प्रशान्त जी 







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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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