मात पिता जीवन आधार (मैथिलि कविता)
💐मात पिता जीवन आधार 💐
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प्रिय ! जीवन किछु एहेन बनलै
ककरो संग कियो नै रहलै ।
सब अछि भागमभाग में लागल
पाई, पत्नी और प्रेम में पागल ।।१।।
माय बापक सब संग अछि छोड़ने
कनिया टा के रहै ओगरने ।
जीवन के उद्देश्य नै किछु छै
बुझत सबटा अपने मरने ।।२।।
पतझड़ में झड़लै सब पत्ता
देखु गाछक पात निपत्ता ।
नवका नवका टुस्सी निकलल
जेना बदलल फेर स सत्ता ।।३।।
पुरना सबटा त्यागि देल तरु
नवका के केलक आधान ।
सुख वसंतक भीजल अन्त:
केने छल बुझु गर्भाधान ।।४।।
प्रसव प्रसूनक मासे भरि में
केलक छोड़ि ओ पुरना पात ।
नवका संगे लहलह करई
सबतरि बुझु नssबे बात ।।५।।
राति में जे छल गाछक संगे
भोरे ओक्कर भूमि आधार ।
जगह घेरि लेने छल ओक्कर
नवका द कियो कष्ट अपार ।।६।।
आ की कष्ट देलक ओ माय के
छोड़ि देलक ओ गाछक संग ।
उड़ि गेल मौक़ा भेटते देरी
जखनहि ओक्कर निकलल पंख ।।७।।
खसल धड़ाम स कनिये काले
नै भेल कियो पालनहार ।
पेलक फल ओ कर्मक अप्पन
देलकै कियो नै पाईनिक धार ।।८।।
अहिना जीवन मनुखो के छै
नवका पाबि पुरनका जाय ।
नव नव कोपल सब के भावय
पुरना नै ककरो छै सोहाय ।।९।।
पुरने चाउर पथ पड़ैत अछि
जखन मनुख अछि पड़ैत बीमार ।
ताईं पुरना नै कखनो छोड़ु
पुरने अछि जीवन आधार ।।१०।।
पुरना पूर्ण हमेशा होइ छै
अनुभव ज्ञान में ओ पारंग ।
जतय कोनो नै आशा रहि जाय
भेटय ओतय पुरनेक संग ।।११।।
चिंतन किछु हो जीवन तत्वक
जिनका कारण अहाँ छी ठार ।
मात-पिता जे जन्म देने छथि
की हुनकर अहाँ बनल आधार ??१२??
नै त अखनो चेतु प्रियवर
राखु हुनक वात्सल्यक मान ।
यदि चाही किछु अपनहुँ भेटै
देल जाउ हुनका सम्मान ।।१३।।
शास्त्र पुराण कत्तौ पढ़ि लिय
सबहक एक्के टा अछि सार ।
हुनका सन भगवानो नै छथि
मात पिता जीवन आधार ।।१४।।
✍🏼©डॉ. संजीत झा सरस
🙏 (२५/०३/३०१७)🙏
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💟💟💟💟💟💟💗💚💚💚✔💗💚💚💚
पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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प्रिय ! जीवन किछु एहेन बनलै
ककरो संग कियो नै रहलै ।
सब अछि भागमभाग में लागल
पाई, पत्नी और प्रेम में पागल ।।१।।
माय बापक सब संग अछि छोड़ने
कनिया टा के रहै ओगरने ।
जीवन के उद्देश्य नै किछु छै
बुझत सबटा अपने मरने ।।२।।
पतझड़ में झड़लै सब पत्ता
देखु गाछक पात निपत्ता ।
नवका नवका टुस्सी निकलल
जेना बदलल फेर स सत्ता ।।३।।
पुरना सबटा त्यागि देल तरु
नवका के केलक आधान ।
सुख वसंतक भीजल अन्त:
केने छल बुझु गर्भाधान ।।४।।
प्रसव प्रसूनक मासे भरि में
केलक छोड़ि ओ पुरना पात ।
नवका संगे लहलह करई
सबतरि बुझु नssबे बात ।।५।।
राति में जे छल गाछक संगे
भोरे ओक्कर भूमि आधार ।
जगह घेरि लेने छल ओक्कर
नवका द कियो कष्ट अपार ।।६।।
आ की कष्ट देलक ओ माय के
छोड़ि देलक ओ गाछक संग ।
उड़ि गेल मौक़ा भेटते देरी
जखनहि ओक्कर निकलल पंख ।।७।।
खसल धड़ाम स कनिये काले
नै भेल कियो पालनहार ।
पेलक फल ओ कर्मक अप्पन
देलकै कियो नै पाईनिक धार ।।८।।
अहिना जीवन मनुखो के छै
नवका पाबि पुरनका जाय ।
नव नव कोपल सब के भावय
पुरना नै ककरो छै सोहाय ।।९।।
पुरने चाउर पथ पड़ैत अछि
जखन मनुख अछि पड़ैत बीमार ।
ताईं पुरना नै कखनो छोड़ु
पुरने अछि जीवन आधार ।।१०।।
पुरना पूर्ण हमेशा होइ छै
अनुभव ज्ञान में ओ पारंग ।
जतय कोनो नै आशा रहि जाय
भेटय ओतय पुरनेक संग ।।११।।
चिंतन किछु हो जीवन तत्वक
जिनका कारण अहाँ छी ठार ।
मात-पिता जे जन्म देने छथि
की हुनकर अहाँ बनल आधार ??१२??
नै त अखनो चेतु प्रियवर
राखु हुनक वात्सल्यक मान ।
यदि चाही किछु अपनहुँ भेटै
देल जाउ हुनका सम्मान ।।१३।।
शास्त्र पुराण कत्तौ पढ़ि लिय
सबहक एक्के टा अछि सार ।
हुनका सन भगवानो नै छथि
मात पिता जीवन आधार ।।१४।।
✍🏼©डॉ. संजीत झा सरस
🙏 (२५/०३/३०१७)🙏
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| कवि -डॉ. संजीत झा सरस जी। |
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पोस्ट :- अशोक कुमार सहनी
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