लिअ नें एखनों कोरा यौ !(वाल गीत )
लिअ नें एखनों कोरा यौ
कखन सँ नें कानि रहल छी
लिअ नें एखनों कोरा यौ !
मां छोड़नें अछि असगर हमरा
कहलक देबौ अंगोरा यौ !
पकड़ि- धकड़ि क' भैया- आनैं
खुअबै मारि छहोरा यौ !
हम रहैत छी टुकटुक टकैत
ल' क' हाथ कटोरा यौ !
बड़ दुख होइयै, बेटी छी तैं
अहुं न बनबै घोड़ा यौ !
असगर रहनें नै चिंता छल
भेलियै जे हम जोड़ा यौ !
फुसिये कहलहुं लछ्मी आयल
हम त' फाटल बोरा यौ !
गोर लगै छी कनियो छन लए
लिअ नें हमरो कोरा यौ !
कोन दंड द' भेजलनि दइबा
माथे लिखलनि लोढ़ा यौ !
बुझबै बाबा, मरिहम तहिया
जहिया जायब असोरा यौ !
कखन सं नें कानि रहल छी
लिअ नें एखनों कोरा यौ•••••
लिअ नें एखनों कोरा यौ•••••
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✍👤अनुप मिश्र (दिल्ली)
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✍👤अनुप मिश्र
कखन सँ नें कानि रहल छी
लिअ नें एखनों कोरा यौ !
मां छोड़नें अछि असगर हमरा
कहलक देबौ अंगोरा यौ !
पकड़ि- धकड़ि क' भैया- आनैं
खुअबै मारि छहोरा यौ !
हम रहैत छी टुकटुक टकैत
ल' क' हाथ कटोरा यौ !
बड़ दुख होइयै, बेटी छी तैं
अहुं न बनबै घोड़ा यौ !
असगर रहनें नै चिंता छल
भेलियै जे हम जोड़ा यौ !
फुसिये कहलहुं लछ्मी आयल
हम त' फाटल बोरा यौ !
गोर लगै छी कनियो छन लए
लिअ नें हमरो कोरा यौ !
कोन दंड द' भेजलनि दइबा
माथे लिखलनि लोढ़ा यौ !
बुझबै बाबा, मरिहम तहिया
जहिया जायब असोरा यौ !
कखन सं नें कानि रहल छी
लिअ नें एखनों कोरा यौ•••••
लिअ नें एखनों कोरा यौ•••••
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✍👤अनुप मिश्र (दिल्ली)
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| लेखक - अनुप मिश्र जी |


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