२५ बर्ष पहिले मैथिलि गीत संगीत आ सुभाष बीरपुरियाँ
२५ बर्ष पहिले मैथिलि गीत संगीत आ सुभाष बीरपुरियाँ
लेखक - सुभाष बीरपुरियाँ
संग गीत के ब्यख्याँ कर नै बहुँत कठिन छै , त्यो ऑय सँ २५ बर्ष पाछुँ के समय देखल जवँ त किछ सगीत प मन्नन करै प बिबश क दै छै ,हर गाँऊ मे संगीतकँ हवा मैथिल के लेल स्वाँस लेनै सन जेना छल.बच्चा स लक बुड़बा ददा तक के जोर छल अपन गामकँ शान बुझै छला हँ ,अपन अपन गामकँ बुँईध क अष्टयाम के मँडप मे अजमाबै छल .मुँद्दा संगीत के गुन , निम्मन घरकँ गुनकारी कलाकार कँ ऐय दुनिया मे घर ऑ जिबन दुनु तबाहँ क दै छै ,वो बात सायद दादा ऑ बाबु जी के तुल्यकँ मैथिल सब नै बुझै छल, संगीतकँ बाट मे संगीत स जुड़ल कालाकार जे अर्थ हँ निमन्न छल ऊनकर सब के दसा देख क अखनो याद आबै य त दिल दहैल जय छै. सगीत सँ दिल टुईट जय छै ,
तकर प्रमान संग संग रहल ऑ देखल श्री मुह स सुनल बिद्यान्नद चौधरी, कुलदिप मन्डल, युसुफ खान , जे सारा ऊमर संगीत कँ भगवान मैन क पुजा केलखिन रुवा रुवा मे सगीत भरल , मुँद्दा जे वोते समय जौ आन काम म दैतै त जिबन ई संसार रुपी जग मे कतौ न कतौ स्थान जरुर नै कम स कम त अपन परिवार के लोग त कैहतै जे कुछ द के गेलै . मुँद्दा अपनौवो के अपजसे लक गेलखिन त्य मे जिबैत जागैत संगीतक रुप मे कुलदिप जी अखनौ छै.संगीत मे गरीब ऑ पुजै बाला के रुप की होय छै किनको जदी जानै ऑ दैखै के हुँ वे त ईनका सब क देखल जव,ईनका सब के इतीहास पलटा बै बाला केयो नै छै .तकर कारन की भ सकै छै वौ त मिथला के मैथली संगीत कँ स्सथा सब के पास मे जबाब छै ,वोत हमर भाग्य कहुँ अअ हम जे अपन दुख गीत रुपी शँब्द मे लिख कँ राखल के पराक्रम बाबा शम्भु नाथ ऑ माँ छिन्मस्ता मैयके दया बुझुँ ऑ पैसा के कमाल किछ जे अपने सब के बिच मे छि .ऑ चिनाबै म कौहना धिरेन्द्र प्रेमर्षि गुरुवँर के आशिष जे कोहना अधो अधुरो क गित क बजा कान्ती पुर हेलो मिथला कार्यक्रम मे ,अपन विवाह के ऊतसब मे अपने सब के सामने खाढ़ केलखिन, नैत हमरो संगीतकँ रुप व्याहँ बुझल जवँ .मिथिला मे सुध मैथिली लोक संगीत लुप्त के अंतीमे अबस्था छै.जो कोय जगह प ल क चेलौ जय छै त र्दोपती के चिर हरण त बचबै बाला कन्हैया छल मुँद्दा अखन त कन्हैया ही लोग सँगीत के अपन कैह क चिर हरण मे लागल छै .त्य सगित मिथिला के अपन छाप नै देख मे आबै छै .आ निक कलाकार के कलाकारी गून छौड़ परै छै , ऑ तकर परिनाम अमन मैथली के गाबैबाला सुर हराल जय छै ऑ रेकडिग म गाबल लाय मैथिली के लोक गितक सुर छि मोहर लागल जय छै छलु हमर लेख प दुख नै मानी
लेखक - सुभाष बिरपुरियाँ
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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| लेखक - सुभाष बिरपुरियाँ जी |
लेखक - सुभाष बीरपुरियाँ
संग गीत के ब्यख्याँ कर नै बहुँत कठिन छै , त्यो ऑय सँ २५ बर्ष पाछुँ के समय देखल जवँ त किछ सगीत प मन्नन करै प बिबश क दै छै ,हर गाँऊ मे संगीतकँ हवा मैथिल के लेल स्वाँस लेनै सन जेना छल.बच्चा स लक बुड़बा ददा तक के जोर छल अपन गामकँ शान बुझै छला हँ ,अपन अपन गामकँ बुँईध क अष्टयाम के मँडप मे अजमाबै छल .मुँद्दा संगीत के गुन , निम्मन घरकँ गुनकारी कलाकार कँ ऐय दुनिया मे घर ऑ जिबन दुनु तबाहँ क दै छै ,वो बात सायद दादा ऑ बाबु जी के तुल्यकँ मैथिल सब नै बुझै छल, संगीतकँ बाट मे संगीत स जुड़ल कालाकार जे अर्थ हँ निमन्न छल ऊनकर सब के दसा देख क अखनो याद आबै य त दिल दहैल जय छै. सगीत सँ दिल टुईट जय छै ,
तकर प्रमान संग संग रहल ऑ देखल श्री मुह स सुनल बिद्यान्नद चौधरी, कुलदिप मन्डल, युसुफ खान , जे सारा ऊमर संगीत कँ भगवान मैन क पुजा केलखिन रुवा रुवा मे सगीत भरल , मुँद्दा जे वोते समय जौ आन काम म दैतै त जिबन ई संसार रुपी जग मे कतौ न कतौ स्थान जरुर नै कम स कम त अपन परिवार के लोग त कैहतै जे कुछ द के गेलै . मुँद्दा अपनौवो के अपजसे लक गेलखिन त्य मे जिबैत जागैत संगीतक रुप मे कुलदिप जी अखनौ छै.संगीत मे गरीब ऑ पुजै बाला के रुप की होय छै किनको जदी जानै ऑ दैखै के हुँ वे त ईनका सब क देखल जव,ईनका सब के इतीहास पलटा बै बाला केयो नै छै .तकर कारन की भ सकै छै वौ त मिथला के मैथली संगीत कँ स्सथा सब के पास मे जबाब छै ,वोत हमर भाग्य कहुँ अअ हम जे अपन दुख गीत रुपी शँब्द मे लिख कँ राखल के पराक्रम बाबा शम्भु नाथ ऑ माँ छिन्मस्ता मैयके दया बुझुँ ऑ पैसा के कमाल किछ जे अपने सब के बिच मे छि .ऑ चिनाबै म कौहना धिरेन्द्र प्रेमर्षि गुरुवँर के आशिष जे कोहना अधो अधुरो क गित क बजा कान्ती पुर हेलो मिथला कार्यक्रम मे ,अपन विवाह के ऊतसब मे अपने सब के सामने खाढ़ केलखिन, नैत हमरो संगीतकँ रुप व्याहँ बुझल जवँ .मिथिला मे सुध मैथिली लोक संगीत लुप्त के अंतीमे अबस्था छै.जो कोय जगह प ल क चेलौ जय छै त र्दोपती के चिर हरण त बचबै बाला कन्हैया छल मुँद्दा अखन त कन्हैया ही लोग सँगीत के अपन कैह क चिर हरण मे लागल छै .त्य सगित मिथिला के अपन छाप नै देख मे आबै छै .आ निक कलाकार के कलाकारी गून छौड़ परै छै , ऑ तकर परिनाम अमन मैथली के गाबैबाला सुर हराल जय छै ऑ रेकडिग म गाबल लाय मैथिली के लोक गितक सुर छि मोहर लागल जय छै छलु हमर लेख प दुख नै मानी
लेखक - सुभाष बिरपुरियाँ
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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