प्रेम चन्द्र अपन मोनक बात हम सुनाबै छि
प्रेम चन्द्र अपन मोनक बात हम सुनाबै छि
✍👤प्रेम चन्द्र झा
सपना मे हम अपन राती सजाबै छि
फेर देखी स्त्यता के हम भोरे लजाबै छि
जे गाछ मानोरथ के बड़ा प्रेम सं रोपल छल
आब हाथ मे अारि ल काटि क ख्साबैत छि
एक स्वपन महल जे दुनियां सं सुंदर छल
केहन भाग हमर सनक भ ठार ज़राबै छि
खान्दान केर इज्जत बर क्स्ट सं बांचल छल
ओ नाचे महफिल मे हम बिना बजाबै छि
बिना मान प्रतिस्ठा केर बाजू ओ मानव की
नै चाही एहन जीबन तें मौत मनाबै छि
प्रेम चन्द्र अपन मोनक बात हम सुनाबै छि
प्रेम चन्द्र अपन मोनक बात हम सुनाबै छि
✍👤प्रेम चन्द्र झा
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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✍👤प्रेम चन्द्र झा
सपना मे हम अपन राती सजाबै छि
फेर देखी स्त्यता के हम भोरे लजाबै छि
जे गाछ मानोरथ के बड़ा प्रेम सं रोपल छल
आब हाथ मे अारि ल काटि क ख्साबैत छि
एक स्वपन महल जे दुनियां सं सुंदर छल
केहन भाग हमर सनक भ ठार ज़राबै छि
खान्दान केर इज्जत बर क्स्ट सं बांचल छल
ओ नाचे महफिल मे हम बिना बजाबै छि
बिना मान प्रतिस्ठा केर बाजू ओ मानव की
नै चाही एहन जीबन तें मौत मनाबै छि
प्रेम चन्द्र अपन मोनक बात हम सुनाबै छि
प्रेम चन्द्र अपन मोनक बात हम सुनाबै छि
✍👤प्रेम चन्द्र झा
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| कवि - प्रेम चन्द्र झा जी |
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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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