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ग्रीष्म प्रवास ( गीत ) आब लागै छै गरमीके जोर भेलै

ग्रीष्म प्रवास ( गीत  ) 
आब लागै छै गरमीके जोर भेलै 

✍👤👩अज्ञात

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लहरि लहरि पानि इन्होर भेलै 
आब लागै छै गरमीके जोर भेलै !

चलू चलू प्रियतम एहि गरमीमे गाम औ 
अंगनामे चतरल छै हुबहर लताम औ 
कलमीके टिकुला टिकोर भेलै
 आब लागै छै गरमीके जोर भेलै !

बगले बथान बहथि कलकल सन कमला 
गामक सीमान जेना शीतल सन शिमला 
सोचिते मुरुझायल  मोन मोर भेलै   
आब लागै छै गरमीके जोर भेलै !

ओत्तहु बिजुरिया बेरूक पहर आबै 
पहिला जकाँने आब ककरो भरमाबै
लत्तीमे खसखस परोर एलै 
आब लागै छै गरमीके जोर भेलै !

भ'रल बैशाख चलि गंगा नेहेबै 
ओहिठामक ज'ल बोझि संग नेने एबै
देखूने खुशीमन बहोर भेलै  
आब लागै छै गरमीके जोर भेलै !   

टटका तोड़ल बतिया खूबे चिबेबै    
उसीनि कांचआम जलजीरके' मिलेबै 
नेना- आनंद  पोरेपोर भेलै 
आब लागै छै गरमीके जोर भेलै !
शिव कुमार टिलु जि

✍👤👩 अज्ञात



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पोस्ट - अशोक कुमार सहनी
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