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रे जान रे ओगरब गाछी बनबू एक मचनियाँ रे जान (ग्रीष्म गीत )

रे जान रे ओगरब गाछी बनबू एक मचनियाँ  रे जान (ग्रीष्म गीत )


✍👤शिव कुमार झा 'टिल्लू'

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सुकुल रसालमे कोसा लगलै सिनुरी कंठ रोहिनियाँ रे जान 
रे जान रे ओगरब गाछी बनबू एक मचनियाँ  रे जान !
पंछी चहचह चहकि रहल छै महमह मोन सजनियाँ  रे जान 
रे जान रे कुहकैत  कोइली हेरै पंथ परनियाँ  रे जान  !
दूधक राज खतम हेतै हो बैसल थान मखनियाँ  रे जान 
रे जान रे पीयर आमसँ सेकब उष्ण नयनियाँ  रे जान !
लोलसँ टपटप लेर चुबै छै बुलबुल मुंह भरनियाँ  रे जान 
रे जान रे खसखस पल्लव सजबै पथ मनसुनियाँ  रे जान !
गरमी भरि ने म'धु- प्रयोजन आमसँ हीया भरनियाँ रे जान 
रे जान रे बरख' हौ इन्दर पछबाक मारल मरनियाँ रे जान !
चलू चलू औ देव दुअरिया करबै सांझ भजनियाँ रे जान 
रे जान रे बादरि गरजै सुनि सुनि शिव कीर्तनियाँ रे जान !।

कवि- शिव कुमार झा 'टिल्लू' जी

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