अहाँ कनिके दिनमे, बेबफा भ गेलौं
***अहाँ कनिके दिनमे, बेबफा भ गेलौं!!***
✍👤दिनेश कुमार राम एहन कोन खोट छल, हमरा प्रेम मे,
जे हमरा, छोरिक चैल गेलौं!
आश त रहे हमरो, मुदा कि करि,
बिधिके बिधान, अहाँ, बदैल देलौँ !!
कतेक तड्पली, मछरी नाहित अहाँ बिनु,
मुदा मोम सन मन, अहाँ बदली लेलौं!
रस्ता देखित इ छन, बित रहल य हमर,
मुदा अहाँ त, देलगेल वचन तोडिलेलौं!!
कतेक समझा क, थाकिगेल हमर साथिसब,
अहाँ त बितल दिन, सेहो भुला गेलौं!
मोन त कानैए हमर, अखन तक,
अहाँ जाइते, अपन जिनगी बना लेलौँं!!
केना क रहल होएब, अहाँ हमरा बिनु,
एतेक जल्दिएअपन छाती, कठोर क लेलौँ!
हृदय त छल अहाँक, कोमल सन,
कोना क अहाँ, पथ्थर भ गेलौं!!
आब जिनगी सँ सब टा, सपना टुटि गेल,
जहिया अहाँ हमरा सँ, पराइ भ गेलौँ !
कनैत दिन आब, पहार सन बुझाइय,
अहाँ कनिके दिन मे, बेबफा बनिगेलौँ!!
✍👤दिनेश कुमार राम
सुगा मधुकरही -६ धनुषा
हाल: दोहा कतार।
✍👤दिनेश कुमार राम एहन कोन खोट छल, हमरा प्रेम मे,
जे हमरा, छोरिक चैल गेलौं!
आश त रहे हमरो, मुदा कि करि,
बिधिके बिधान, अहाँ, बदैल देलौँ !!
कतेक तड्पली, मछरी नाहित अहाँ बिनु,
मुदा मोम सन मन, अहाँ बदली लेलौं!
रस्ता देखित इ छन, बित रहल य हमर,
मुदा अहाँ त, देलगेल वचन तोडिलेलौं!!
कतेक समझा क, थाकिगेल हमर साथिसब,
अहाँ त बितल दिन, सेहो भुला गेलौं!
मोन त कानैए हमर, अखन तक,
अहाँ जाइते, अपन जिनगी बना लेलौँं!!
केना क रहल होएब, अहाँ हमरा बिनु,
एतेक जल्दिएअपन छाती, कठोर क लेलौँ!
हृदय त छल अहाँक, कोमल सन,
कोना क अहाँ, पथ्थर भ गेलौं!!
आब जिनगी सँ सब टा, सपना टुटि गेल,
जहिया अहाँ हमरा सँ, पराइ भ गेलौँ !
कनैत दिन आब, पहार सन बुझाइय,
अहाँ कनिके दिन मे, बेबफा बनिगेलौँ!!
✍👤दिनेश कुमार राम
सुगा मधुकरही -६ धनुषा
हाल: दोहा कतार।
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| कवि - दिनेश कुमार राम जी |


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