कर्म करैत जाऊ फलक चिन्ता जूनि करू इंसान
"कर्म "
जेहन कर्म करब तेहने फल देता भगबान !
ई सुन्दर आ सार्थक अछि गीताक ग्यान !
कलियुगक ई अछि बड़का मूल मंत्र महान !
जे सब जई काज में लागल छी ,
मोन सँ करू ओहि काजक सम्मान !
दिन-राईत सदिखन सोचू ओकरहि उत्थान!
तखने अहॉ सफल होयब यौ श्रीमान् !
आ वैह बनब एहि युग में सफल इंसान !
दश दीस जँ मोन दौरायब ?
अधिखिच्चू काज सबटा भय जायत !
नहि कोनोटा काज पूरा होयत ,
मोन में टेंशन आ जेबो खाली होयत !
फेर घबराहट में सबटा काज उलटा-पुलटा होयत !
बिना मतलब के शुगर आ ब्लडप्रेशर के बजायब !
हमर मानी तअ' सूनू ई बात ?
कर्म करैत जाऊ फल'क चिन्ता जुनि करू इंसान !
जेहन कर्म करब तेहने फल देता भगबान !
ई सुन्दर आ सार्थक अछि गीताक ग्यान ! कलियुगक ई अछि बड़का मूल मंत्र महान !
✍👤विनय कुमर
परिहारपुर, मधुबनी
✍👤विनय कुमार
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कर्म करैत जाऊ फलक चिन्ता जूनि करू इंसान !जेहन कर्म करब तेहने फल देता भगबान !
ई सुन्दर आ सार्थक अछि गीताक ग्यान !
कलियुगक ई अछि बड़का मूल मंत्र महान !
जे सब जई काज में लागल छी ,
मोन सँ करू ओहि काजक सम्मान !
दिन-राईत सदिखन सोचू ओकरहि उत्थान!
तखने अहॉ सफल होयब यौ श्रीमान् !
आ वैह बनब एहि युग में सफल इंसान !
दश दीस जँ मोन दौरायब ?
अधिखिच्चू काज सबटा भय जायत !
नहि कोनोटा काज पूरा होयत ,
मोन में टेंशन आ जेबो खाली होयत !
फेर घबराहट में सबटा काज उलटा-पुलटा होयत !
बिना मतलब के शुगर आ ब्लडप्रेशर के बजायब !
हमर मानी तअ' सूनू ई बात ?
कर्म करैत जाऊ फल'क चिन्ता जुनि करू इंसान !
जेहन कर्म करब तेहने फल देता भगबान !
ई सुन्दर आ सार्थक अछि गीताक ग्यान ! कलियुगक ई अछि बड़का मूल मंत्र महान !
✍👤विनय कुमर
परिहारपुर, मधुबनी
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| कवि - विनय कुमार जी |


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