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अंजनीकेँ ललन हनुमान यौ सगर संसारक करु कल्याण यौ

अंजनीकेँ ललन हनुमान यौ सगर संसारक करु कल्याण यौ 

✍👤मैथिल प्रशान्त

अंजनीकेँ ललन हनुमान यौ ।
बहिन सीता बुझथि संतान यौ ।। 
एहि नातासँ ।वैदेही मातासँ ।। 
भेलियै मिथिलाक अहाँ भगिनमान यौ । 

राम नामक बजाक' अहाँ डंका । 
एक  क्षणमे जरा देलियै लंका ।। 
बुद्धिशाली अहाँ । शक्तिशाली अहाँ ।। 
छी बड़का अहाँ बलवान यौ । 

अंश छी बजरंगी महादेवक ।
सियारामक प्रभु अहाँ सेवक ।।
संकटमोचन सुनू ।कष्ट हमरो हरु ।।
अहाँ बचा लेलियै लक्ष्मणकेँ प्राण ।

सुमिरन अहाँक भय भगबय । 
चलि आबी अहाँ किओ बजबय ।। 
हे महावीर । अहाँ बिपतियोमे थीर ।। 
सगर संसारक करु कल्याण यौ ।। 

~>  मैथिल प्रशान्त 
   दुर्गौली, बेनीपट्टी ।

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