दशमिमे भक्ति ग़ज़ल
मैयाके आँगनसँ एलै हकार दशमीमे
करबै दुनू परानी जयकार दशमीमे
विधिसँ विधानसँ आओर दूभि धानसँ
पूजा करै छै सगर संसार दशमीमे
लाले चनमा लोभाबै छै मनमा हमर
लाले चूड़ी आ गहना सिंगार दशमीमे
ल' क ' तरूआइर मा महिखाकेँ माइर
करथिन्ह दानवके मैया संघार दशमीमे
गोहराबै प्रशान्त जग भ' जेतै शान्त
करथिन्ह अम्बे नेहक संचार दशमीमे
~> मैथिल प्रशान्त
दुर्गौली, बेनीपट्टी ।
कोई टिप्पणी नहीं