अपन मिथिला में
जनम लेलौउ मिथिला में
बास अछि कलकता में
मन अनेरो अहुरिआ काटय
जोतल खेत में कियै घास लय ।
नै चुका पायब मातृभूमि के ऋण
मूदा रहब गाम में कि खास लय
ईच्छा अछि जे अंतिम समय
बेटा आओता दिल्ली कि लाश लय ।
जीवनक आपाधापी में बिसरर्लौ
कि बैसब गाम में आब ताश लय
धेलौ परदेश धन सम्पति बहुत रास लय ।
मूदा सब किछ रहितो
बनल छी एखनो भिख्मँगा
नै करई छी किछुओ यत्न
वापसी अपन गाम लय ।
करैत माँ मिथिला सदिखन पुकार
वापस आऊ संतान हमर
आँचर हम एख्णो ओरने छी
अहिं सबहक साँसक आश लय ।
कहैथ "कृष्ण "आऊ मैथिल
अपन गाम यौ
व्याकुल अछि माँ मिथिला के
अहिं सब लय प्राण यौ ।
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जय मिथिला जय दलान
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✍कृष्णा जी
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