बिनती करै छि मैया
चाहि नहि हिरा मोती हे मैया,
दियौ सबके अहाँ रोटी हे मैया ।
तड़पै छै कियो भूखे सँ अहिठाम ,
ककरो भरने छियै अहाँ कोठी हे मैया।
छै सन्नूक भरल किनको आभूषण सँ अहिठाम
किनको तन पर छै नइ धोती हे मैया ।
दिमक लगै छै कतेक पुस्तक में अहिठाम
ककरो भेटै नइ पढ़ लेल पोथी हे मैया ।
सब पर दया अहाँ करियौ अहिठाम
बिजय बिनती करैए कल जोड़ी हे मैया ।
✍बिजय कुमार झा
देवडिहा, जनकपुर, मिथिला - नेपाल
प्रबास : नोएडा, उत्तर प्रदेश - भारत
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