अपन गाम
चल-चल मीता ,, रे मीता !
चल चल मीता अपन गाम छै सब सँ सुन्दर मिथिला धाम
काज - राज के दहक विराम चल घूमि आबी अपन गाम
चल-चल .........
हो ~ बोली छै मिठगर एतए माटि छै पावन
सीता बहिन केर नीपल मिथिला केर आँगन
कोशी बहै छै बिहुँसैत कमला - बलान रे
चल मीता बैसब सब मिल अपन दलान रे
सउँसे गम-गम करए छै महुआ-२ आर गाछ में आम
रे चल - चल मीता अपन गाम ......
चल घूमब डीह अयाचिक सरिसब गाम में
घूमब जनकपुर सउँसे अपन परिधान में
चूरा-दही, चीनी,तिलकोरक तरुआ,आचार रे
भरि पेट खेबए हेतए दन-दन मियाज रे
सुग्गा जतए वेद सुनाबए -२ पाहुन छथि श्री राम
रे चल चल मीता अपन गाम छै सब सँ सुन्दर मिथिला धाम
काज - राज के दहक विराम चल घूमि आबी अपन गाम
•••••• ✍Manish Jha
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