हमहुँ कविता लिखैत छि - अप्पन मिथिला -Appanmithila is Maithili Portal for News ,Articles and Entertainment

Breaking News

हमहुँ कविता लिखैत छि

हमहूँ कविता लिखैत छी

सचसँ दूर भागि
कल्पनामे जागि
विहार करैत छी
हमहूँ कविता लिखैत छी

जगतक वेदना सुना कऽ
सबसँ दरेग पाबि कऽ
सन्तोष करैत छी
हमहूँ कविता लिखैत छी

वाक्य विन्यासक बंसीसँ
शब्दक फेकल जालसँ
कल्पनाक माछ मारैत छी
हमहूँ कविता लिखैत छी |

खुशामद पर प्रहार करैत
अपना पर विश्वास रखैत
निज भाषा अनुरागी छी
हमहूँ कविता लिखैत छी |

कविताओ मे आवाज होयत छैक
दीन-हीनक सेहो अधिकार होयत छैक
से हम मानैत छी
हमहूँ कविता लिखैत छी |
__✍Akhilesh Jha जी

कोई टिप्पणी नहीं