दिल तुइट गेलै
सपना रहे जे दिल में ओ टुइट गेल,,,,
अपना बनाके केउ छुइट गेल,,,,,,
नै जानी कोना आब जियब हुनका बिना,,
इहे सोची सोची बिधाता हमर रुइठ गेल,,,,,,
किया निर्दैया भेला हे बिधाता ,,,हमरा
के दर्द में छोइर के अपने चिता में सुईत गेल,,,,,
सपना रहे जे दिल में ओ टुइट गेल,,,,,
अपना बनाके केउ छुइट गेल,,,,,,,
हुनका बिना आब जिनगी के सबटा तार छुइट गेल,
करू आब की सबटा मुसीबत हमरे कपार में जुइट गेल,,,,,,
सपना रहे जे दिल में ओ टुइट गेल,,,,,
अपना बनाके केउ छुइट गेल,,,,,,,,
✍अहमद रेज़ा
हाँसपट्टी ८
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