अहि सँ प्रीत लगेलौ पिया
अहिं सँ प्रीत लगेलौं पिया,,,,
अहिं के जिनगी के मीत बनेलौं पिया,,,,,,
छोइर देली सखी सहेली ,
मुदा अहीँक सूरत मन में सजेलौं पिया,,,,,
मन घबराईये ,की छुइट नै जाइ छाती के स्नेह,,,,
ओहि स ,भगबानक महिमा अपनेलौं पिया,,,,,,
सादा सुहागन रहब,ओहिसँ बरसाईत पावन मनेलौं पिया,,,,,,,
छोइर देली सखी सहेली ,
मुदा अहीँक सूरत मन में सजेलौं पिया,,,
लागे नै कोनो बैरिन के टोना ,,,हँसत खेलत परिवार में,,,,
मायक ममता भरल पुरल छै घर आ दुवार में,,,
नजैर गुजैर लागत ओहि से नेमो आ मिरचाई दुवार पर लटकेलौं पिया ,,,,
छोइर देली सखी सहेली ,
मुदा अहीँक सूरत मन में सजेलौं पिया,,,,,
अहिं सँ प्रीत लगेलौं पिया,,,,
अहिं के जीनगी के मीत बनेलौं पिया,,,,
लेखक ✍ अहमद रेज़ा
हाँसपट्टी ८ धनुषा
हॉल -(दोहा क़तार)
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