गीत बनालिय
जीवन भरी गाबैत रहब एहन गीत बनालिय,,,,,,,
जनम जनम साथ रहब एहन प्रीत बनालिय,,,,,,,
कतबो आबे आपत बिपत ,मुदा साथ नै छोरब एहन रीत बनालिय ,,,,,,,
छूटी जाइ साँसक डोर मुदा साथ नै छोटे,,,
रुइठ जाइ जगत मुदा प्रियतम नै रुठे,,,,
जगमग जगमग करे जिनगीक डोर ,एहन संगीत बनालिय,,,,,,
जनम जनम साथ रहब एहन प्रीत बनालिय,,,,,,
भरल डगर में परै बिपत ,,मुदा जीबन में साथ देत एहन हित बनालिया ,,,,,
जनम जनम साथ रहब एहन प्रीत बनालिय,,,,,,
जीबन भर गाबैत रहब एहन गीत बनालिय,,,,
जनम जनम साथ रहब एहन प्रीत बनालिय,,,,,,
✍अहमद रेज़ा
हाँसपट्टी ८ धनुषा
हॉल ( दोहा क़तार )
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