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दहेजक आगि

कहिया तक हम मरयति रहबै
दहेजक आगि अथाह
यौ भैया कहु बुझाई
यौ बाबु बाजु सुनाई

एखनो धरि मिथिला मे
हम दहेजक आगि जरै छी
गुण आ शील भुला कय
बस टाका लेल मरै छी
गरिबक बेटिक एहि दुनियाँ मे
कोना हैत निर्बाह
यौ भैया कहु बुझाई
यौ बाबु बाजु सुनाई

धिक थिक ओ ईंशान जे
बधु केर प्राण हरै छथि
छथि ओ ब्रह्म पिशाच कोना ओ
स्वं के मनुक्ख कहै छथि
अपन बेटी हृदय के टुकड़ा
कियै नै दोसर लेल परबाह
यौ भैया कहु बुझाई
यौ बाबु बाजु सुनाई

औरो कतेक बेटी
आबो अप्पन जान गमेती
बनितथि घर जे लक्ष्मी
कहिया तक गरदनि फंदा लेती
एखनो सुनै ने कानब
ई दुनियाँ थीक बताह
यौ भैया कहु बुझाई
यौ बाबु बाजु सुनाई

✍अदिति झा जी

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